दिल्ली: सिविल लाइन जोन में रिश्वतखोरी का खुलासा, MCD कर्मचारी स्टॉल लगाने वालों से वसूल रहे 35,000 रुपये तक

  • दिल्ली के सिविल लाइन जोन में एमसीडी (दिल्ली नगर निगम) के कर्मचारियों द्वारा अवैध तरीके से स्टॉल लगाने वालों से रिश्वत लेने का मामला सामने आया है।
  • व्यापारियों और छोटे विक्रेताओं से 35,000 रुपये तक की वसूली की जा रही थी, ताकि वे अपने स्टॉल बिना किसी बाधा के लगा सकें।
  • भ्रष्टाचार की यह घटना एमसीडी प्रशासन के लिए एक बड़ा झटका है, और इसमें शामिल अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की जा रही है।

रिश्वतखोरी का खुलासा:

दिल्ली के सिविल लाइन जोन में एमसीडी कर्मचारियों की रिश्वतखोरी का बड़ा मामला सामने आया है। जानकारी के मुताबिक, एमसीडी के कुछ कर्मचारी स्टॉल लगाने वाले छोटे व्यापारियों से 35,000 रुपये तक की अवैध वसूली कर रहे थे। यह रकम स्टॉल लगाने की अनुमति के नाम पर ली जा रही थी, ताकि व्यापारी बिना किसी दिक्कत के अपने स्टॉल चला सकें।

रिश्वत देने वाले व्यापारियों का कहना है कि उन्हें डराया-धमकाया गया, कि अगर उन्होंने पैसे नहीं दिए, तो उनके स्टॉल या दुकानें एमसीडी द्वारा जब्त कर ली जाएंगी। ऐसे में छोटे व्यापारियों के पास कोई विकल्प नहीं बचा और उन्हें रिश्वत देनी पड़ी।

भ्रष्टाचार का तरीका:

रिपोर्ट्स के मुताबिक, एमसीडी कर्मचारियों ने स्थानीय अधिकारियों की मिलीभगत से यह भ्रष्टाचार का जाल बिछाया था। किसी भी व्यापारी या स्टॉल लगाने वाले को इलाके में बिना अनुमति के व्यापार नहीं करने दिया जाता था।

  • पहले कर्मचारियों द्वारा इन व्यापारियों को धमकाया जाता था कि वे बिना इजाजत स्टॉल नहीं लगा सकते।
  • इसके बाद उनसे एक निश्चित राशि वसूली जाती थी, जो कि 10,000 से 35,000 रुपये के बीच थी, और यह वसूली हर महीने की जाती थी।
  • वसूली गई इस रकम को कुछ अधिकारियों के बीच बांटा जाता था, जिससे इस अवैध धंधे को समर्थन मिल रहा था।

व्यापारियों का विरोध:

इस अवैध वसूली के खिलाफ व्यापारियों ने आवाज उठाई है। उनका कहना है कि पहले से ही उनकी आर्थिक स्थिति कमजोर है, और ऊपर से इस तरह की रिश्वतखोरी उनके लिए बड़ा संकट बन गई है। कुछ व्यापारियों ने इसकी शिकायत एमसीडी प्रशासन से की, जिसके बाद इस मामले का खुलासा हुआ।

एक व्यापारी ने बताया, “हमारे पास वैसे ही कमाई के सीमित साधन हैं। जब हम अपने स्टॉल के लिए एमसीडी से आधिकारिक अनुमति लेते हैं, तो इस तरह की अवैध वसूली क्यों हो रही है? हमें हर महीने मोटी रकम देनी पड़ती है, जो हमारे लिए बड़ा बोझ बन गया है।”

प्रशासन की प्रतिक्रिया:

एमसीडी प्रशासन ने इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए कहा है कि वे इस तरह के भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं करेंगे। प्रशासन ने तुरंत मामले की जांच के आदेश दिए हैं और जो भी कर्मचारी या अधिकारी इसमें दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

एक वरिष्ठ एमसीडी अधिकारी ने कहा, “यह एक गंभीर मामला है, और हम इस तरह के भ्रष्टाचार को कतई सहन नहीं करेंगे। दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी, और हम सुनिश्चित करेंगे कि व्यापारियों को किसी भी तरह की अवैध वसूली का सामना न करना पड़े।”

भ्रष्टाचार पर रोक लगाने की जरूरत:

दिल्ली में एमसीडी भ्रष्टाचार कोई नई बात नहीं है, लेकिन इस तरह की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, जिससे आम जनता और व्यापारियों के बीच नाराजगी बढ़ रही है। व्यापारियों का कहना है कि अगर एमसीडी भ्रष्टाचार पर लगाम नहीं लगाई गई, तो उनकी आजीविका पर गहरा असर पड़ेगा।

सिविल लाइन जोन में हुए इस खुलासे ने एमसीडी की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। छोटे व्यापारियों और स्टॉल लगाने वालों का कहना है कि उन्हें प्रशासन से सहयोग की उम्मीद थी, लेकिन रिश्वतखोरी ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।

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