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पीएम मोदी, एर्दोगान, पुतिन और जिनपिंग… डोनाल्ड ट्रंप की जीत से किस वर्ल्ड लीडर का बढ़ेगा दबदबा तो किसके लिए खतरा, जानें

07/11/2024

2024 अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के परिणामों ने वैश्विक राजनीति में हलचल मचा दी है। अगर डोनाल्ड ट्रंप फिर से अमेरिका के राष्ट्रपति चुने जाते हैं, तो इसका असर केवल अमेरिकी नीतियों पर ही नहीं, बल्कि वैश्विक शक्तियों के संबंधों पर भी होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, तुरकी के राष्ट्रपति एर्दोगान, रूस के राष्ट्रपति पुतिन, और चीन के राष्ट्रपति जिनपिंग के लिए ट्रंप की जीत अलग-अलग तरीके से अहम हो सकती है।

1. प्रधानमंत्री मोदी के लिए: अवसर या चुनौती?

डोनाल्ड ट्रंप की वापसी भारत के लिए mixed signals लेकर आ सकती है। एक तरफ, ट्रंप की ‘America First’ नीति के कारण वैश्विक व्यापार और संरक्षणवाद में बदलाव आ सकता है, जो भारत के लिए कुछ चुनौतियाँ पैदा कर सकता है। हालांकि, मोदी और ट्रंप के बीच निजी रिश्ते अच्छे रहे हैं और दोनों नेताओं के बीच मजबूत संबंध भारत-अमेरिका के रिश्तों को स्थिर कर सकते हैं।

भारत को रक्षा, व्यापार, और सुरक्षा के क्षेत्र में अमेरिका से समर्थन मिल सकता है, लेकिन अगर ट्रंप फिर से चीन के खिलाफ ठोस कदम उठाते हैं, तो भारत और अमेरिका के बीच नई साझेदारी को और मजबूती मिल सकती है। ट्रंप की नीतियां अगर भारत के राष्ट्रीय हितों के अनुकूल होती हैं, तो मोदी के लिए यह एक अवसर साबित हो सकता है।

2. एर्दोगान के लिए: अस्थिरता या लाभ?

तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोगान की स्थिति में ट्रंप की जीत से अस्थिरता आ सकती है। ट्रंप ने कभी भी तुर्की को पूर्ण रूप से सहयोग नहीं दिया और तुर्की की नीतियों, खासकर सीरिया और क्यूबा के मामले में, ट्रंप के दृष्टिकोण में विरोधाभास था। हालांकि, एर्दोगान के साथ ट्रंप की व्यक्तिगत समझ थी, लेकिन तुर्की के लिए आंतरिक और बाहरी नीति में बदलाव मुश्किल हो सकता है।

तुर्की और अमेरिका के रिश्तों में तनाव बढ़ने की संभावना है, और एर्दोगान को वैश्विक मंच पर अपनी स्थिति बनाए रखने में मुश्किलें आ सकती हैं। विशेष रूप से नाटो और यूरोपीय यूनियन के साथ तुर्की के संबंधों में कठिनाई हो सकती है, अगर ट्रंप का शासन फिर से सख्त हो जाता है।

3. पुतिन के लिए: दबदबा बढ़ेगा

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के लिए ट्रंप की जीत एक सकारात्मक संकेत हो सकती है। ट्रंप के कार्यकाल के दौरान, रूस और अमेरिका के रिश्ते कुछ हद तक बेहतर रहे थे, खासकर यूक्रेन युद्ध से पहले। ट्रंप की ‘America First’ नीति और रूस के साथ नजदीकी रिश्ते की वजह से पुतिन को फायदा हुआ था।

अगर ट्रंप फिर से सत्ता में आते हैं, तो पुतिन के लिए यूक्रेन संकट और पश्चिमी देशों से विरोध कम हो सकता है, और रूस को अंतरराष्ट्रीय मंच पर कुछ राहत मिल सकती है। ट्रंप के शासन में रूस के खिलाफ पश्चिमी प्रतिबंधों में ढील मिलने की संभावना है, जो पुतिन की विदेश नीति को मजबूती प्रदान कर सकता है।

4. जिनपिंग के लिए: खतरा या चुनौती?

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के लिए ट्रंप की वापसी खतरे की घंटी हो सकती है। ट्रंप ने अपने पिछले कार्यकाल में चीन के खिलाफ कड़ी नीतियां अपनाई थीं, खासकर व्यापार युद्ध और टैरिफ की पॉलिसी को लेकर। यदि ट्रंप फिर से सत्ता में आते हैं, तो चीन को अमेरिकी व्यापार नीति में कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ सकता है, खासकर सामरिक और तकनीकी मोर्चे पर।

चीन के लिए ट्रंप की ‘America First’ नीति, जो वैश्विक स्तर पर संरक्षणवाद को बढ़ावा देती है, न केवल व्यापार के मोर्चे पर, बल्कि ग्लोबल इन्वेस्टमेंट और ग्रीन एनर्जी में भी चीन को आर्थिक नुकसान पहुँचा सकती है। इसके अलावा, रूस-चीन रिश्तों में भी तनाव बढ़ सकता है, क्योंकि ट्रंप की नीतियां दोनों देशों के गठबंधन को चुनौती दे सकती हैं।

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Author

सुनील शर्मा

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