उत्तरकाशी में बादल फटने से मची तबाही: 4 की मौत, रेस्क्यू जारी, राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ने जताया दुख
उत्तरकाशी में बादल फटने से तबाही: 4 की मौत, 20 लोगों का रेस्क्यू, राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ने जताया दुख

उत्तरकाशी में बादल फटने से मची तबाही: 4 की मौत, रेस्क्यू जारी, राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ने जताया दुख

उत्तरकाशी में बादल फटने से तबाही: राहत और बचाव कार्य जारी

उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के धराली गांव में मंगलवार को बादल फटने से भारी तबाही मची है। इस प्राकृतिक आपदा में अब तक 4 लोगों की मौत हो चुकी है जबकि कई लोग लापता बताए जा रहे हैं। राहत और बचाव कार्य तेजी से चला या जा रहा है। SDRF, NDRF और भारतीय सेना की टीमें घटनास्थल पर मौजूद हैं और मलबे में फंसे लोगों को निकालने का प्रयास जारी है।”


राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ने जताया दुख

इस दुखद घटना पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर लिखा कि उत्तरकाशी में बादल फटने की खबर अत्यंत दुखद है। राष्ट्रपति ने पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की और राहत कार्यों में सफलता की कामना की। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से फोन पर बात कर स्थिति की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री ने हर संभव मदद का भरोसा दिलाया है और केंद्र सरकार की ओर से सभी सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।


कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज की प्रतिक्रिया

उत्तराखंड सरकार में कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने इस त्रासदी को दुखद और हृदय विदारक बताया। उन्होंने बताया कि जैसे ही सूचना मिली, वैसे ही SDRF और NDRF की टीमें घटनास्थल पर पहुंच गईं। राज्य सरकार ने युद्धस्तर पर राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिए हैं। मंत्री ने यह भी बताया कि धराली क्षेत्र में लगभग 80 साल पहले भी इस तरह की आपदा घट चुकी है। इस बार सरकार पूरी तरह सतर्क है और मुख्यमंत्री पुष्कर धामी के नेतृत्व में स्थिति पर नियंत्रण रखने का प्रयास किया जा रहा है।


सेना का त्वरित एक्शन: 20 लोगों का रेस्क्यू

भारतीय सेना के लेफ्टिनेंट कर्नल मनीष श्रीवास्तव ने जानकारी दी कि मंगलवार दोपहर को हर्षिल के पास धराली गांव के नजदीक बादल फटने की घटना हुई। अचानक भारी मात्रा में पानी और मलबा गांव में घुस आया जिससे कई घर क्षतिग्रस्त हो गए और निवासियों को गंभीर नुकसान पहुंचा। हर्षिल में तैनात सेना की यूनिट ने मात्र 10 मिनट के भीतर घटनास्थल पर पहुंचकर राहत कार्य शुरू कर दिया। अब तक करीब 20 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है। लापता लोगों की तलाश अभी भी जारी है।


राहत कार्यों में जुटी एजेंसियां

घटनास्थल पर SDRF, NDRF की दो टीमें और भारतीय सेना की एक टीम मौजूद है। सेना की टीम में करीब 80 जवान शामिल हैं। सभी एजेंसियां मिलकर प्रभावित लोगों को सुरक्षित निकालने और क्षेत्र को सामान्य करने की दिशा में कार्य कर रही हैं। इस आपदा में संचार और यातायात की सुविधाएं भी प्रभावित हुई हैं। सिंचाई विभाग और लोक निर्माण विभाग के अधिकारी मौके पर डटे हुए हैं और स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।


मुख्यमंत्री पुष्कर धामी ने दी जानकारी

मुख्यमंत्री धामी ने सोशल मीडिया पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि उन्होंने स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस आपदा की जानकारी दी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार सभी प्रभावित परिवारों के साथ खड़ी है और हर संभव मदद प्रदान की जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रभावित गांवों में बिजली, पानी और भोजन की आपूर्ति सुनिश्चित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। मेडिकल टीमें भी भेजी जा चुकी हैं।


उत्तरकाशी में पहले भी हो चुकी हैं इस प्रकार की घटनाएं

उत्तरकाशी का क्षेत्र भौगोलिक दृष्टि से संवेदनशील माना जाता है। यहां पहले भी कई बार भूस्खलन और बादल फटने की घटनाएं हो चुकी हैं। धराली गांव में 80 साल पहले भी इसी तरह की आपदा आई थी, जिसमें जान-माल का बड़ा नुकसान हुआ था।


“उत्तरकाशी में बादल फटने से एक बार फिर यह स्पष्ट हो गया है कि पर्वतीय क्षेत्रों में प्राकृतिक आपदाएं किस हद तक नुकसान पहुंचा सकती हैं। हालांकि राहत की बात यह है कि SDRF, NDRF और सेना की तत्परता से कई लोगों की जान बचाई जा चुकी है। राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री की संवेदना और केंद्र सरकार की ओर से मिली सहायता राज्य के लिए राहत की बात है। सरकार और प्रशासन की त्वरित कार्रवाई के चलते राहत कार्य प्रभावी ढंग से चल रहा है। अब ज़रूरत है कि भविष्य में ऐसी आपदाओं से निपटने के लिए और बेहतर तैयारी की जाए।”

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