भारत बना वैश्विक चिकित्सा पर्यटन का केंद्र, अप्रैल 2025 तक 1.3 लाख विदेशी पर्यटक इलाज के लिए आए

भारत में चिकित्सा उद्देश्यों के लिए विदेशी पर्यटकों की संख्या में वृद्धि

“भारत अब सिर्फ एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि एक वैश्विक स्वास्थ्य केंद्र के रूप में उभर रहा है। केंद्रीय पर्यटन और संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने संसद में बताया कि अप्रैल 2025 तक भारत में चिकित्सा उद्देश्यों से आने वाले विदेशी पर्यटकों (एफटीए) की संख्या 1,31,856 तक पहुँच चुकी है। यह कुल विदेशी पर्यटकों का लगभग 4.1% है।”


पिछले पांच वर्षों में मेडिकल टूरिज्म में जबरदस्त उछाल

केंद्रीय मंत्री के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में चिकित्सा पर्यटन में भारी वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2020 में जहां 1.8 लाख विदेशी पर्यटक इलाज के लिए भारत आए थे, वहीं 2024 तक यह संख्या बढ़कर 6.4 लाख हो गई।

हालांकि 2023 में यह संख्या 6.5 लाख थी, जो 2024 की तुलना में थोड़ी अधिक रही। इसके बावजूद, चिकित्सा पर्यटन की दिशा में यह निरंतर सकारात्मक विकास का संकेत है।


बांग्लादेश, इराक, सोमालिया जैसे देश बने प्रमुख स्रोत

भारत में इलाज के लिए आने वाले ज्यादातर विदेशी नागरिक बांग्लादेश, इराक, सोमालिया, ओमान और उज्बेकिस्तान जैसे देशों से आते हैं। ये देश भारत के स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र पर विश्वास जताते हैं, खासकर सस्ती, कुशल और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाओं के कारण।


‘हील इन इंडिया’ अभियान से मेडिकल टूरिज्म को मिली नई दिशा

सरकार ने 2025 के बजट में ‘हील इन इंडिया’ (Heal in India) अभियान की घोषणा की थी। यह योजना सरकारी और निजी साझेदारी (PPP) के ज़रिए भारत को वैश्विक हेल्थ और वेलनेस हब बनाने की दिशा में काम कर रही है।

इस योजना में प्रमुख निजी अस्पताल, मेडिकल एसोसिएशन और व्यापारिक संगठन शामिल हैं, जो चिकित्सा सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ाने, मरीजों को बेहतर अनुभव देने और विदेशी नागरिकों के लिए भारत को आकर्षक गंतव्य बनाने पर काम कर रहे हैं।


ई-मेडिकल वीज़ा सुविधा से हुआ विदेशियों का प्रवेश आसान

भारत सरकार ने 171 देशों के नागरिकों के लिए ई-मेडिकल वीज़ा और ई-मेडिकल अटेंडेंट वीज़ा की सुविधा शुरू की है। इससे विदेशी नागरिकों को इलाज के लिए भारत आना और अधिक सुविधाजनक हो गया है।

2023 से 2024 के बीच, भारत ने 123 नियमित आयुष वीज़ा और 221 ई-आयुष वीज़ा जारी किए, जिससे पता चलता है कि विदेशियों में भारतीय आयुष पद्धति के प्रति भी आकर्षण बढ़ रहा है।


चिकित्सा पर्यटन में आयुष प्रणाली का योगदान

भारत की पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियाँ — आयुर्वेद, योग, प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी (AYUSH) — आज वैश्विक स्तर पर पहचान बना चुकी हैं। इन प्रणालियों की वैज्ञानिक मान्यता और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती मांग के कारण भारत में वेलनेस और चिकित्सा पर्यटन को नई ऊँचाई मिल रही है।


मेडिकल इकोसिस्टम में निजी और सार्वजनिक सहयोग

मंत्री शेखावत ने बताया कि भारत में चिकित्सा पर्यटन के इकोसिस्टम में कई संस्थाएँ शामिल हैं, जैसे:

  • प्रमुख अस्पताल और क्लीनिक
  • होटल और आवास सेवाएँ
  • एयरलाइंस और यात्रा एजेंसियाँ
  • नियामक निकाय और सरकारी विभाग

इन सभी का समन्वित प्रयास भारत को एक मेडिकल डेस्टिनेशन बनाने में सहायक हो रहा है।


भारत की वैश्विक रैंकिंग और बाजार आकार

भारत का चिकित्सा पर्यटन उद्योग लगभग 9 अरब डॉलर का है और यह लगातार बढ़ रहा है। ग्लोबल मेडिकल टूरिज्म इंडेक्स में भारत दसवें स्थान पर है। आने वाले वर्षों में इसके शीर्ष 5 में आने की संभावना है, अगर यही गति बनी रही।


भविष्य की संभावनाएँ और विस्तार की योजना

भारत सरकार मेडिकल टूरिज्म को और सशक्त बनाने के लिए निम्नलिखित कदम उठा रही है:

  1. अंतरराष्ट्रीय रोगियों के लिए हेल्पलाइन और भाषा सहायता
  2. एयरपोर्ट पर मेडिकल सहायता डेस्क
  3. समर्पित मेडिकल टूरिज्म पोर्टल
  4. ई-मेडिकल रिकॉर्ड्स और इंटरफेस

इस तरह के डिजिटल और लॉजिस्टिक सुधारों से आने वाले वर्षों में भारत की स्थिति और मज़बूत होगी।


“भारत ने चिकित्सा पर्यटन में जो मुकाम हासिल किया है, वह सरकारी नीतियों, बेहतर हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर और विश्वसनीय इलाज की सेवाओं का नतीजा है। ‘हील इन इंडिया’ अभियान, ई-मेडिकल वीज़ा सुविधा, और आयुष पद्धतियों के बढ़ते प्रभाव से भारत वैश्विक स्वास्थ्य केंद्र बनने की ओर अग्रसर है। यदि यह गति बनी रही, तो आने वाले वर्षों में भारत चिकित्सा पर्यटन में विश्व का अग्रणी देश बन सकता है।”

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