कुड़मी आंदोलन से रेल सेवाएं प्रभावित

“झारखंड में कुड़मी आंदोलन शनिवार की सुबह से शुरू हुआ। आंदोलनकारियों ने कई रेलवे स्टेशनों पर रेल रोको प्रदर्शन किया। इससे धनबाद रेल मंडल की ट्रेनें बुरी तरह प्रभावित हुईं। यात्रियों को घंटों इंतजार करना पड़ा और अधिकांश को यात्रा बीच में छोड़नी पड़ी। कुड़मी समाज की प्रमुख मांग अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा और कुड़माली भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में सम्मिलित करना है। प्रशासन ने निषेधाज्ञा लागू कर दी है, फिर भी आंदोलन जारी है।”

किन ट्रेनों पर पड़ा कुड़मी आंदोलन का असर कुड़मी आंदोलन के कारण कई ट्रेनें रद्द करनी पड़ीं। कुछ को बीच रास्ते में रोकना पड़ा और कुछ का रूट बदल दिया गया।

रद्द की गई ट्रेनें

  • धनबाद-पटना इंटरसिटी
  • बरवाडीह-गोमो मेमू पैसेंजर
  • गोमो-बरवाडीह मेमू पैसेंजर
  • चंद्रपुरा-धनबाद मेमू पैसेंजर
  • गोमो-आसनसोल पैसेंजर
  • सिंदरी-धनबाद पैसेंजर

बीच में रोकी गई ट्रेनें

  • धनबाद-सासाराम इंटरसिटी (गोमो में रोकी गई)
  • पटना-बरकाकाना एक्सप्रेस (टोरी में रोकी गई)
  • आसनसोल-हटिया पैसेंजर (हजारीबाग टाउन में रोकी गई)
  • आसनसोल-वाराणसी मेमू एक्सप्रेस (मुगमा में रोकी गई)

आंशिक रूप से चली ट्रेनें

  • र्दमान-हटिया मेमू एक्सप्रेस (आसनसोल तक)
  • पटना-रांची जनशताब्दी एक्सप्रेस (कोडरमा तक)
  • पटना-रांची वंदे भारत एक्सप्रेस (गया तक)

परिवर्तित मार्ग वाली ट्रेनें कुड़मी आंदोलन के दौरान जिन ट्रेनों का रूट बदल दिया गया उनमें शामिल हैं:

  • जम्मूतवी-कोलकाता एक्सप्रेस
  • बीकानेर-सियालदह दुरंतो एक्सप्रेस
  • अजमेर-सियालदह एक्सप्रेस
  • नई दिल्ली-हावड़ा पूर्वा एक्सप्रेस
  • वाराणसी-आसनसोल मेमू एक्सप्रेस
  • हावड़ा-रांची शताब्दी एक्सप्रेस
  • सियालदह-गांधीधाम स्पेशल ट्रेन

कुड़मी आंदोलन ने यात्रियों की परेशानी के. कुड़मी आंदोलन के असर से स्टेशनों पर अफरा-तफरी का ढेर था. प्लेटफार्म पर कई यात्री अपने गंतव्य तक नहीं पहुंच सके. लंबी दूरी की ट्रेनों के रुक जाने और रद्द होने के साथ सैकड़ों लोग बीच रास्ते में फंसे रहे. रेलवे प्रशासन लगातार स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास कर रहा है। यात्रियों से अपील की गई है कि वे यात्रा से पहले रेलवे की आधिकारिक वेबसाइट या ऐप पर ट्रेन की स्थिति जांच लें।

कुड़मी आंदोलन की मुख्य मांगें कुड़मी समाज लंबे समय से अपनी दो प्रमुख मांगों को लेकर संघर्ष कर रहा है:

  • समाज का कहना है कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक आधार पर उन्हें यह दर्जा मिलना चाहिए।
  • कुड़माली भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में
  • आंदोलनकारियों का तर्क है कि कुड़माली एक प्राचीन भाषा है और इसे संवैधानिक मान्यता मिलनी चाहिए।

प्रशासन और रेलवे की रणनीति प्रशासन ने कुड़मी आंदोलन को देखते हुए कई जगहों पर सुरक्षा बल तैनात किए हैं। निषेधाज्ञा लागू करने के बावजूद आंदोलनकारी रेलवे ट्रैक पर डटे हुए हैं। रेलवे ने यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए ट्रेनों के मार्ग परिवर्तित किए हैं और रद्दीकरण की जानकारी सार्वजनिक की है।

यात्रियों के लिए सुझाव रेलवे प्रशासन ने यात्रियों को याद दिलाया है कि वे वैकल्पिक यात्रा माध्यम का उपयोग करें। इसके अलावा, ट्रेन में चढ़ने से पहले रेलवे की अधिकृत सूचना पढ़ें। भविष्य की स्थिति कुड़मी समाज ने चेतावनी दी है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, आंदोलन जारी रहेगा। ऐसे में आने वाले दिनों में और भी ट्रेनें प्रभावित हो सकती हैं। यात्रियों को सावधानी और धैर्य रखने की आवश्यकता है।

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