Sunil Sharma | The Morning Star यूरोप के लिए ग्रीनलैंड खनिज अधिकार अब सिर्फ संसाधनों का मुद्दा नहीं रह गया है। यह ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा क्षमता और रणनीतिक आत्मनिर्भरता से सीधे जुड़ चुका है। अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump द्वारा नाटो के साथ बनाए गए नए फ्रेमवर्क में यूरोप की भूमिका अहम मानी जा रही है। इस समझौते के तहत यूरोपीय देश भी ग्रीनलैंड खनिज अधिकार में साझेदार होंगे। इसका सीधा लाभ यह होगा कि यूरोप रेयर अर्थ मिनरल्स के लिए चीन पर निर्भरता कम कर सकेगा। ये खनिज इलेक्ट्रिक वाहन, रक्षा उपकरण और ग्रीन एनर्जी तकनीक के लिए जरूरी हैं।
NATO के जरिए बना यह फ्रेमवर्क यूरोप को अमेरिका के साथ सुरक्षा सहयोग भी देता है। गोल्डन डोम जैसी रक्षा योजनाओं में भागीदारी से यूरोपीय देशों की सामूहिक सुरक्षा मजबूत होगी। साथ ही, आर्कटिक क्षेत्र में यूरोप की रणनीतिक मौजूदगी भी बढ़ेगी। ग्रीनलैंड अधिकार को लेकर यूरोप अब एक उपभोक्ता नहीं, बल्कि भागीदार की भूमिका में आ रहा है। यह बदलाव भविष्य की वैश्विक राजनीति में यूरोप की स्थिति को और मजबूत कर सकता है।
FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)
प्रश्न 1: ग्रीनलैंड यूरोप के लिए क्यों जरूरी हैं?
ग्रीनलैंड में मौजूद रेयर अर्थ मिनरल्स यूरोप की ऊर्जा और रक्षा सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं।
प्रश्न 2: क्या इससे यूरोप की चीन पर निर्भरता घटेगी?
हां, ग्रीनलैंड खनिज अधिकार यूरोप को वैकल्पिक और सुरक्षित आपूर्ति स्रोत प्रदान करेंगे।
प्रश्न 3: नाटो की इसमें क्या भूमिका है?
नाटो इस फ्रेमवर्क के जरिए सुरक्षा सहयोग और संसाधन साझेदारी सुनिश्चित करता है।

