कल्याण-डोंबिवली नगर निगम (KDMC) चुनाव के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) ने शिवसेना (शिंदे गुट) को समर्थन देने का फैसला किया है। इस कल्याण-डोंबिवली MNS समर्थन से नगर निगम में सत्ता संतुलन पूरी तरह बदल गया है और मेयर पद की दौड़ और दिलचस्प हो गई है। MNS के पूर्व विधायक प्रमोद राजू पाटिल ने पांचों पार्षदों की ओर से समर्थन की आधिकारिक घोषणा की। उन्होंने कहा कि यह निर्णय शहर के विकास को ध्यान में रखकर लिया गया है। KDMC चुनाव में शिवसेना (शिंदे गुट) 53 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। अब MNS के 5 पार्षदों के साथ उनकी संख्या 58 हो गई है।
कल्याण से सांसद श्रीकांत शिंदे ने पुष्टि की कि MNS का समर्थन विकास के उद्देश्य से मिला है। उन्होंने यह भी बताया कि शिवसेना और भाजपा ने महायुति के तहत चुनाव लड़ा था और मेयर भी महायुति से ही बनेगा। भाजपा की ओर से ढाई-ढाई साल के मेयर कार्यकाल का फॉर्मूला सामने रखा गया है। अंतिम निर्णय उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण मिलकर लेंगे। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि कल्याण-डोंबिवली MNS समर्थन ने उद्धव ठाकरे गुट की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)
Q1. MNS ने शिवसेना (शिंदे गुट) को समर्थन क्यों दिया?
शहर के विकास और स्थिर नगर निगम सरकार के लिए MNS ने यह फैसला लिया।
Q2. KDMC में शिवसेना के पास अब कितनी सीटें हैं?
MNS समर्थन के बाद शिवसेना (शिंदे गुट) के पास 58 पार्षद हो गए हैं।
Q3. मेयर कौन बनेगा?
मेयर महायुति से बनेगा, अंतिम फैसला शिवसेना और भाजपा नेतृत्व करेगा।

