Byline: Jai Sharma | The Morning Star
उत्तर प्रदेश के Kanpur में हुआ कानपुर लैंबॉर्गिनी हादसा एक बार फिर सुर्खियों में है। तेज रफ्तार लग्ज़री कार की टक्कर से कई लोग घायल हो गए थे। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह उठा कि एफआईआर में आरोपी का नाम तुरंत क्यों नहीं जोड़ा गया। शुरुआती एफआईआर में “अज्ञात व्यक्ति” लिखा गया, जबकि मौके पर मौजूद लोगों और वीडियो फुटेज में आरोपी साफ दिखाई दे रहा था।
इस कानपुर लैंबॉर्गिनी हादसा को लेकर जैसे-जैसे वीडियो सामने आए, वैसे-वैसे पुलिस पर दबाव बढ़ता गया। सोशल मीडिया और स्थानीय लोगों की नाराज़गी के बाद पुलिस ने एक दिन बाद एफआईआर में शिवम मिश्रा का नाम दर्ज किया। जांच अधिकारियों का कहना है कि जांच के दौरान उनकी मौजूदगी प्रमाणित हुई, इसलिए नाम जोड़ा गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हादसे के वक्त कार बहुत तेज रफ्तार में थी। टक्कर के बाद चालक ने रुकने के बजाय भागने की कोशिश की। इस दौरान उसके साथ मौजूद बाउंसरों की भूमिका भी सवालों के घेरे में आई। लोगों का कहना है कि अगर समय पर कार्रवाई होती, तो विवाद इतना नहीं बढ़ता।
यह कानपुर लैंबॉर्गिनी हादसा अब सिर्फ सड़क दुर्घटना का मामला नहीं रहा। यह कानून की निष्पक्षता और पुलिस की जवाबदेही से भी जुड़ गया है। आगे की जांच और कानूनी कार्रवाई पर सभी की नजर बनी हुई है।
FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)
प्रश्न 1: कानपुर लैंबॉर्गिनी हादसा कब हुआ?
यह हादसा रविवार को कानपुर की वीआईपी रोड पर हुआ।
प्रश्न 2: FIR में नाम देरी से क्यों जोड़ा गया?
शुरुआत में आरोपी को “अज्ञात” बताया गया था। बाद में जांच और वीडियो सबूत के आधार पर नाम जोड़ा गया।
प्रश्न 3: हादसे में कितने लोग घायल हुए?
इस हादसे में कुल छह लोग घायल हुए थे।
