डिजिटल गिरफ्तारी ठगी पर SC सख्त, SOP के निर्देश

भारत में बढ़ती डिजिटल गिरफ्तारी ठगी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने ऐसे साइबर अपराधों को सीधे तौर पर “डकैती” की श्रेणी में रखते हुए केंद्र सरकार को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि पीड़ितों की सुरक्षा के लिए एक ठोस और व्यावहारिक SOP तैयार की जाए। यह SOP बैंकों, RBI और दूरसंचार विभाग जैसे अहम संस्थानों से परामर्श के बाद लागू होगी।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि डिजिटल गिरफ्तारी ठगी के मामलों में बैंकों की भूमिका बेहद अहम है। यदि किसी खाते में अचानक असामान्य और बड़े लेन-देन होते हैं, तो बैंक को तुरंत ग्राहक को अलर्ट करना चाहिए। अदालत ने इसे बैंकों की नैतिक और कानूनी जिम्मेदारी बताया।

गृह मंत्रालय ने कोर्ट को जानकारी दी कि साइबर ठगी से निपटने के लिए एक इंटर-डिपार्टमेंटल कमेटी बनाई गई है। इस कमेटी का उद्देश्य सिस्टम की खामियों को दूर करना और पीड़ितों को रियल-टाइम सुरक्षा देना है। रिपोर्ट के अनुसार, बीते कुछ वर्षों में डिजिटल ठगी के ज़रिए हजारों करोड़ रुपये की हेराफेरी हो चुकी है।सुप्रीम कोर्ट का यह रुख आने वाले समय में डिजिटल गिरफ्तारी ठगी पर लगाम लगाने में अहम साबित हो सकता है। SOP लागू होने के बाद पीड़ितों को न सिर्फ तेज़ न्याय मिलेगा, बल्कि मुआवज़े का रास्ता भी साफ होगा।

Sunil Sharma | The Morning Star

FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

Q1. डिजिटल गिरफ्तारी ठगी क्या है?
यह एक साइबर ठगी है, जिसमें ठग फर्जी एजेंसियों के नाम पर डराकर पैसे ऐंठते हैं।

Q2. सुप्रीम कोर्ट ने क्या निर्देश दिए हैं?
कोर्ट ने SOP बनाने, बैंक अलर्ट सिस्टम मजबूत करने और मुआवज़े का ढांचा तैयार करने को कहा है।

Q3. आम लोगों को क्या सावधानी रखनी चाहिए?
किसी भी धमकी भरे कॉल या मैसेज पर तुरंत बैंक और साइबर हेल्पलाइन से संपर्क करें।

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