गिग वर्कर्स मुद्दा | कम आय, अस्थिर नौकरी और सोशल सिक्योरिटी की चुनौती

By Jai Sharma | The Morning Star

देश में गिग वर्कर्स मुद्दा तेजी से चर्चा का विषय बनता जा रहा है। फूड डिलीवरी, क्विक कॉमर्स और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़े लाखों कर्मचारी अस्थिर आय और सामाजिक सुरक्षा की कमी से जूझ रहे हैं। हालिया इकोनॉमिक सर्वे में भी गिग इकॉनमी को लेकर चिंता जताई गई है। रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 40% गिग वर्कर्स की मासिक आय 15 हजार रुपए से कम है।

विशेषज्ञों का मानना है कि गिग वर्कर्स को न्यूनतम कमाई की गारंटी मिलनी चाहिए। इसके अलावा, काम के इंतजार के समय का भुगतान भी जरूरी है। फिलहाल अधिकतर गिग वर्कर्स को पेंशन, मेडिकल बीमा या दुर्घटना कवर जैसी सुविधाएं नहीं मिलतीं। यही कारण है कि गिग वर्कर्स मुद्दा केवल रोजगार नहीं, बल्कि सम्मान और सुरक्षा से जुड़ा विषय बन गया है।

सरकार और कंपनियों दोनों की जिम्मेदारी तय करने की मांग उठ रही है। कई रिपोर्ट्स में सुझाव दिया गया है कि कंपनियां अपने कर्मचारियों की ट्रेनिंग और एसेट्स में निवेश करें। इससे उनकी आय और भविष्य दोनों सुरक्षित हो सकते हैं। आने वाले वर्षों में गिग इकॉनमी का GDP में बड़ा योगदान होने की संभावना है, लेकिन इसके साथ मजबूत कानून भी जरूरी हैं।

FAQ

प्रश्न 1: गिग वर्कर्स मुद्दा क्या है?
यह उन समस्याओं से जुड़ा है जिनका सामना डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने वाले कर्मचारी करते हैं, जैसे कम आय और सोशल सिक्योरिटी की कमी।

प्रश्न 2: इकोनॉमिक सर्वे ने क्या सुझाव दिए?
सर्वे ने न्यूनतम कमाई तय करने और इंतजार के समय का भुगतान करने की सिफारिश की है।

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