जल संकट 2026 | पानी पर बढ़ता वैश्विक दबाव और अस्थिरता
Sunil Sharma | The Morning Star
दुनिया इस समय जल संकट 2026 के दौर से गुजर रही है। बढ़ती आबादी, जलवायु परिवर्तन और कमजोर जल प्रबंधन ने हालात को गंभीर बना दिया है। कई देशों में नदियों का जलस्तर गिर रहा है और भूजल तेजी से खत्म हो रहा है। विशेषज्ञ मानते हैं कि जल संकट 2026 केवल पर्यावरणीय मुद्दा नहीं, बल्कि आर्थिक और सुरक्षा चुनौती भी है।
सूखा लंबा खिंच रहा है। बारिश अनियमित हो चुकी है। कई शहरों में पेयजल आपूर्ति बाधित हो रही है। यही वजह है कि जल संकट 2026 अब वैश्विक मंचों पर प्रमुख विषय बन गया है। अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं चेतावनी दे रही हैं कि यदि जल प्रबंधन में सुधार नहीं हुआ, तो सामाजिक अस्थिरता बढ़ सकती है।
संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में “वॉटर बैंकक्रप्सी” शब्द का उल्लेख किया गया है। इसका अर्थ है कि कई क्षेत्र उपलब्ध संसाधनों से अधिक पानी उपयोग कर रहे हैं। यदि यही रफ्तार जारी रही, तो आने वाले वर्षों में हालात और बिगड़ सकते हैं। इसलिए जल संकट 2026 को लेकर सरकारों और उद्योगों दोनों को जिम्मेदार कदम उठाने होंगे।
FAQs
प्रश्न 1: जल संकट 2026 क्यों बढ़ रहा है?
उत्तर: बढ़ती मांग, घटती आपूर्ति और जलवायु परिवर्तन इसके मुख्य कारण हैं।
प्रश्न 2: वॉटर बैंकक्रप्सी क्या है?
उत्तर: जब क्षेत्र अपने जल भंडार से अधिक पानी खर्च करते हैं, उसे वॉटर बैंकक्रप्सी कहते हैं।
प्रश्न 3: समाधान क्या है?
उत्तर: जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन और टिकाऊ नीति ही स्थायी समाधान है।

