पनामा रोग प्रतिरोध जीन | केले की फसल को बचाने की ऐतिहासिक खोज
दुनिया भर में केले की खेती फ्यूजेरियम विल्ट यानी पनामा रोग से जूझ रही है। यह मिट्टी में रहने वाला खतरनाक फंगस है, जो खासकर Cavendish किस्म को तेजी से नष्ट करता है। ऐसे समय में वैज्ञानिकों ने पनामा रोग प्रतिरोध जीन की पहचान कर बड़ी सफलता हासिल की है।
ऑस्ट्रेलिया के The University of Queensland के शोधकर्ताओं ने जंगली केले की प्रजाति Calcutta 4 में यह पनामा रोग प्रतिरोध जीन खोजा। यह जीन Fusarium wilt Sub Tropical Race 4 (STR4) के खिलाफ प्राकृतिक सुरक्षा प्रदान करता है।
शोध में पाया गया कि यह प्रतिरोध क्रोमोसोम 5 पर स्थित है। वैज्ञानिकों ने संवेदनशील और प्रतिरोधी पौधों के डीएनए की तुलना कर इस जीन की पुष्टि की। यह खोज इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पनामा रोग मिट्टी को वर्षों तक संक्रमित रखता है और भविष्य की फसल को भी खतरे में डालता है।
अब वैज्ञानिक इस पनामा रोग प्रतिरोध जीन के आधार पर नई व्यावसायिक किस्म विकसित करने की दिशा में काम कर रहे हैं। इससे ऐसी केले की किस्म तैयार हो सकेगी जो स्वादिष्ट भी हो और रोग से सुरक्षित भी।
FAQ
प्रश्न 1: पनामा रोग क्या है?
यह फ्यूजेरियम फंगस से होने वाली बीमारी है, जो केले के पौधे को सूखा देती है।
प्रश्न 2: पनामा रोग प्रतिरोध जीन कहां मिला?
यह जीन Calcutta 4 नामक जंगली केले में मिला।
प्रश्न 3: इससे किसानों को क्या फायदा होगा?
नई किस्में रोग से सुरक्षित होंगी, जिससे उत्पादन और आय बढ़ेगी।

