कैटरपिलर की ताल | चींटी संचार की अनोखी विज्ञान कहानी
प्रकृति में संचार के कई अनोखे तरीके हैं, लेकिन कैटरपिलर की ताल ने वैज्ञानिकों को हैरान कर दिया है। हालिया शोध के अनुसार कुछ कैटरपिलर कंपन के जरिए चींटियों की भाषा की नकल करते हैं। यही कैटरपिलर की ताल उन्हें चींटियों से सुरक्षा और भोजन दिलाती है।
अध्ययन में पाया गया कि गॉसामर-विंग्ड तितलियों के लार्वा, खासकर Tetramorium और Myrmica प्रजाति की चींटियों के साथ घनिष्ठ संबंध बनाते हैं। ये लार्वा मिट्टी के जरिए नियमित कंपन पैदा करते हैं। उनकी यह लय मेट्रोनोम जैसी सटीक होती है।
शोधकर्ताओं ने संवेदनशील माइक्रोफोन से इन संकेतों को रिकॉर्ड किया। नतीजों से साफ हुआ कि जो कैटरपिलर पूरी तरह चींटियों पर निर्भर हैं, उनकी कैटरपिलर की ताल सबसे जटिल होती है। इससे चींटियां उन्हें अपने समूह का हिस्सा मान लेती हैं।
यह खोज बताती है कि लय केवल इंसानों तक सीमित नहीं है। कीटों में भी संचार का यह तरीका बेहद प्रभावी है।
Sunil Sharma | The Morning Star
FAQ
प्रश्न 1: कैटरपिलर की ताल क्या है?
उत्तर: यह कंपन आधारित संचार है, जिससे कैटरपिलर चींटियों से जुड़ते हैं।
प्रश्न 2: कैटरपिलर को इससे क्या लाभ मिलता है?
उत्तर: उन्हें सुरक्षा, भोजन और कभी-कभी चींटी घोंसले में जगह मिलती है।
प्रश्न 3: क्या यह लय इंसानों जैसी है?
उत्तर: नहीं, लेकिन इसका पैटर्न नियमित और सटीक होता है।

