ईरान-इजराइल जंग | मध्य पूर्व में बढ़ता तनाव और वैश्विक असर
मध्य पूर्व में जारी ईरान-इजराइल जंग ने क्षेत्रीय सुरक्षा हालात को गंभीर बना दिया है। हालिया हवाई हमलों और मिसाइल जवाबी कार्रवाई के बाद दोनों देशों में हाई अलर्ट घोषित किया गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, राजधानी तेहरान और तेल अवीव के आसपास कई धमाकों की आवाजें सुनी गईं। सुरक्षा एजेंसियां लगातार स्थिति की समीक्षा कर रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान-इजराइल जंग केवल सैन्य टकराव तक सीमित नहीं है। इसका असर तेल बाजार, अंतरराष्ट्रीय उड़ानों और वैश्विक कूटनीति पर भी पड़ रहा है। कई एयरलाइंस ने अपने रूट बदल दिए हैं। वहीं, ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है।
भारत समेत कई देशों ने अपने नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी की है। भारतीय दूतावासों ने लोगों से सतर्क रहने और गैर-जरूरी यात्रा से बचने की अपील की है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय शांति वार्ता की अपील कर रहा है ताकि ईरान-इजराइल जंग का दायरा और न बढ़े।
रक्षा विश्लेषकों का कहना है कि स्थिति फिलहाल संवेदनशील है। हालांकि, कूटनीतिक स्तर पर बातचीत के प्रयास भी जारी हैं। आने वाले दिनों में हालात किस दिशा में जाएंगे, यह दोनों पक्षों के कदमों पर निर्भर करेगा।
Sunil Sharma | The Morning Star
FAQ
प्रश्न 1: ईरान-इजराइल जंग क्यों शुरू हुई?
हालिया हवाई हमलों और जवाबी कार्रवाई के बाद तनाव बढ़ा, जिससे सैन्य टकराव की स्थिति बनी।
प्रश्न 2: क्या इसका असर भारत पर पड़ेगा?
प्रत्यक्ष असर सीमित है, लेकिन तेल कीमत और उड़ानों पर प्रभाव पड़ सकता है।
प्रश्न 3: क्या नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी हुई है?
हाँ, कई देशों ने अपने नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी है।

