भारतीय सिनेमा में दर्शकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए एक बड़ा बदलाव किया गया है। सेंसर बोर्ड यानी CBFC ने घोषणा की है कि अब फिल्मों में फिल्म सबटाइटल और ऑडियो डिस्क्रिप्शन देना जरूरी होगा। इस फैसले का उद्देश्य सिनेमा को अधिक समावेशी और सभी के लिए सुलभ बनाना है।
दरअसल, भारत में बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं जिन्हें सुनने या देखने में कठिनाई होती है। ऐसे दर्शकों के लिए फिल्म सबटाइटल और ऑडियो डिस्क्रिप्शन बेहद मददगार साबित हो सकते हैं। सबटाइटल के जरिए दर्शक स्क्रीन पर लिखे संवाद पढ़ सकते हैं, जबकि ऑडियो डिस्क्रिप्शन के माध्यम से फिल्म के महत्वपूर्ण दृश्य और घटनाएं आवाज के जरिए समझाई जाती हैं।
फिल्म विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम भारतीय सिनेमा को वैश्विक मानकों के करीब लाने में मदद करेगा। कई देशों में पहले से ही फिल्म सबटाइटल और ऑडियो डिस्क्रिप्शन जैसी सुविधाएं अनिवार्य हैं। इससे दिव्यांग दर्शकों को भी फिल्मों का आनंद लेने का समान अवसर मिलता है।
हालांकि सोशल मीडिया पर इस फैसले को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कुछ लोगों ने इसे सराहनीय पहल बताया है, जबकि कुछ दर्शकों को लगता है कि इससे थिएटर में फिल्म देखने का अनुभव बदल सकता है।
फिर भी विशेषज्ञों का कहना है कि समय के साथ दर्शक इस बदलाव को स्वीकार कर लेंगे और इससे सिनेमा सभी के लिए अधिक सुलभ बनेगा।
Sunil Sharma | The Morning Star
FAQ
1. फिल्म सबटाइटल और ऑडियो डिस्क्रिप्शन क्या होता है?
फिल्म सबटाइटल स्क्रीन पर दिखने वाला टेक्स्ट होता है, जबकि ऑडियो डिस्क्रिप्शन में दृश्य और गतिविधियों का आवाज के जरिए वर्णन किया जाता है।
2. यह नियम किसने लागू किया है?
यह नियम केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड यानी CBFC द्वारा लागू किया गया है।
3. इससे किसे फायदा होगा?
इससे सुनने और देखने में कठिनाई वाले दर्शकों को फिल्मों को समझने में बड़ी मदद मिलेगी।
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