Central Board of Secondary Education ने इस साल 12वीं बोर्ड परीक्षा के मूल्यांकन में बड़ा बदलाव किया है। बोर्ड ने कॉपियों की जांच के लिए CBSE OSM मार्किंग सिस्टम को लागू किया है। इस नई डिजिटल प्रक्रिया से अंकों की टोटलिंग में होने वाली गलतियां लगभग पूरी तरह खत्म हो गई हैं। शिक्षा मंत्रालय के स्कूल एजुकेशन एंड लिट्रेसी विभाग के सचिव Sanjay Kumar ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि CBSE OSM मार्किंग प्रक्रिया छात्रों के लिए अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष साबित हो रही है।
इस दौरान Rahul Singh और Sanyam Bhardwaj भी मौजूद रहे। CBSE OSM मार्किंग के तहत पहले उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन किया जाता है। इसके बाद हर कॉपी को एक यूनिक कोड दिया जाता है। जांच के दौरान शिक्षक को छात्र का नाम और रोल नंबर दिखाई नहीं देता। इससे पक्षपात की संभावना कम हो जाती है। शिक्षकों को केवल प्राप्तांक दर्ज करना होता है। वहीं कंप्यूटर सिस्टम कुल अंकों की गणना खुद करता है। इससे टोटलिंग एरर खत्म हो जाती है। बोर्ड का कहना है कि इस डिजिटल प्रक्रिया से रिजल्ट सिस्टम पहले से अधिक मजबूत बना है।
FAQ
Q1. CBSE OSM मार्किंग क्या है?
यह ऑन स्क्रीन मार्किंग सिस्टम है, जिसमें कॉपियों की जांच डिजिटल तरीके से की जाती है।
Q2. CBSE OSM मार्किंग का सबसे बड़ा फायदा क्या है?
इससे अंकों की टोटलिंग में होने वाली गलतियां खत्म हो जाती हैं।
Q3. क्या छात्र का नाम शिक्षक को दिखाई देता है?
नहीं, जांच के दौरान छात्र की पहचान छिपाई जाती है।

