CBSE थ्री-लैंग्वेज फॉर्मूला पर बढ़ा विवाद | पेरेंट्स और टीचर्स ने जताई चिंता
देशभर में लागू होने जा रहे CBSE थ्री-लैंग्वेज फॉर्मूला को लेकर छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों के बीच नाराजगी बढ़ती जा रही है। Central Board of Secondary Education ने 1 जुलाई से नई भाषा नीति लागू करने का आदेश दिया है। यह फैसला नई शिक्षा नीति 2020 के तहत लिया गया है। नई व्यवस्था के अनुसार छात्रों को दो भारतीय भाषाओं के साथ एक विदेशी भाषा भी पढ़नी होगी। अंग्रेजी को विदेशी भाषा की श्रेणी में शामिल किए जाने के बाद कई परिवारों ने इस फैसले पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि पहले से जर्मन, फ्रेंच और जापानी जैसी भाषाएं पढ़ रहे छात्रों को अब नई भारतीय भाषा सीखनी पड़ सकती है।
अभिभावकों का मानना है कि अचानक लागू किया गया CBSE थ्री-लैंग्वेज फॉर्मूला बच्चों पर अतिरिक्त पढ़ाई का दबाव बढ़ाएगा। वहीं स्कूल प्रशासकों ने भी कहा है कि अतिरिक्त भाषा पढ़ाने के लिए नए शिक्षकों और अतिरिक्त पीरियड की जरूरत पड़ेगी। इससे स्कूलों की समय सारिणी और बजट दोनों प्रभावित होंगे। शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह नियम शुरुआती कक्षाओं से धीरे-धीरे लागू किया जाता, तो छात्रों को ज्यादा परेशानी नहीं होती। फिलहाल यह मुद्दा शिक्षा जगत में बड़ी बहस का विषय बन गया है।
FAQ
Q1. CBSE थ्री-लैंग्वेज फॉर्मूला क्या है?
यह नई भाषा नीति है, जिसमें छात्रों को दो भारतीय भाषाओं और एक विदेशी भाषा का अध्ययन करना होगा।
Q2. यह नियम कब से लागू होगा?
सीबीएसई के अनुसार यह नियम 1 जुलाई से लागू किया जाएगा।
Q3. अभिभावक इस फैसले का विरोध क्यों कर रहे हैं?
अभिभावकों का कहना है कि इससे बच्चों पर अतिरिक्त पढ़ाई का दबाव बढ़ेगा।
Q4. क्या विदेशी भाषा पढ़ने वाले छात्र प्रभावित होंगे?
हाँ, पहले से विदेशी भाषा पढ़ रहे छात्रों को नई भारतीय भाषा सीखनी पड़ सकती है।

