सरायकेला भाजपा गुटबाजी | चंपई सोरेन और अर्जुन मुंडा समर्थकों के बीच बढ़ी राजनीतिक दूरी
झारखंड की राजनीति में इन दिनों सरायकेला भाजपा गुटबाजी लगातार चर्चा में बनी हुई है। आदित्यपुर नगर निगम चुनाव के बाद भारतीय जनता पार्टी के अंदर शुरू हुआ विवाद अब खुलकर सामने आने लगा है। जिले में भाजपा कार्यकर्ता दो अलग-अलग गुटों में बंटे दिखाई दे रहे हैं। एक तरफ पूर्व मुख्यमंत्री Champai Soren के समर्थक सक्रिय हैं, जबकि दूसरी ओर पूर्व मुख्यमंत्री Arjun Munda का प्रभाव मजबूत माना जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि इस अंदरूनी खींचतान का असर भाजपा संगठन पर साफ दिखाई दे रहा है। कई आंदोलनों और पार्टी कार्यक्रमों में नेताओं की अनुपस्थिति ने कार्यकर्ताओं के बीच असमंजस बढ़ा दिया है।
राजनगर आंदोलन, किसानों के प्रदर्शन और बिजली-पानी मुद्दे पर हुए धरनों में भी गुटबाजी की झलक दिखाई दी। नगर निगम चुनाव के दौरान टिकट बंटवारे को लेकर दोनों गुटों के बीच मतभेद बढ़े थे। महापौर और उप-महापौर चुनाव में अलग-अलग उम्मीदवारों को समर्थन देने के बाद यह विवाद और गहरा गया। राजनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि भाजपा जल्द संगठनात्मक एकता नहीं दिखाती, तो इसका फायदा Jharkhand Mukti Morcha को मिल सकता है।
FAQ
सवाल 1: सरायकेला भाजपा गुटबाजी क्यों बढ़ी?
नगर निगम चुनाव में टिकट और समर्थन को लेकर विवाद के बाद गुटबाजी बढ़ी।
सवाल 2: भाजपा में कौन-कौन से गुट सक्रिय हैं?
चंपई सोरेन और अर्जुन मुंडा समर्थक गुट सक्रिय बताए जा रहे हैं।
सवाल 3: क्या इसका असर संगठन पर पड़ रहा है?
हाँ, कई कार्यक्रमों में नेताओं की दूरी से संगठन प्रभावित हुआ है।

