उत्तराखंड में बढ़ती गर्मी के साथ जंगलों में आग की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। राज्य के पौड़ी, चमोली, रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़, टिहरी, देहरादून, नैनीताल और उत्तरकाशी जिले सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। बढ़ता तापमान और कम बारिश अब जंगलों के लिए बड़ा खतरा बन चुके हैं। यही वजह है कि “उत्तराखंड वनाग्नि संकट” तेजी से गंभीर होता जा रहा है। वन विभाग के अनुसार चीड़ के जंगल आग फैलने की सबसे बड़ी वजह हैं। चीड़ की सूखी पत्तियां यानी पिरुल आग को तेजी से फैलाती हैं। तेज हवा और पहाड़ी ढलानों के कारण कुछ ही मिनटों में बड़ा क्षेत्र आग की चपेट में आ जाता है। इससे वन्यजीवों और जैव विविधता पर भी खतरा बढ़ रहा है।
साल 2015 से अब तक राज्य में 15 हजार से अधिक वनाग्नि की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। इन घटनाओं में हजारों हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रभावित हुआ है। जंगलों से उठता धुआं लोगों के स्वास्थ्य पर भी असर डाल रहा है। कई जलस्रोत सूखने लगे हैं, जिससे ग्रामीण इलाकों में परेशानी बढ़ गई है। वन विभाग ने संवेदनशील जिलों में निगरानी बढ़ा दी है। फायर वाच टावर सक्रिय किए गए हैं और राहत दलों को अलर्ट पर रखा गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण आने वाले समय में यह संकट और बढ़ सकता है।
FAQ
सवाल: उत्तराखंड में जंगलों की आग का मुख्य कारण क्या है?
जवाब: बढ़ता तापमान, कम बारिश और चीड़ की सूखी पत्तियां जंगलों में आग फैलने का मुख्य कारण हैं।
सवाल: सबसे ज्यादा प्रभावित जिले कौन से हैं?
जवाब: चमोली, पौड़ी, रुद्रप्रयाग, देहरादून और नैनीताल सबसे अधिक प्रभावित जिलों में शामिल हैं।
सवाल: वन विभाग क्या कदम उठा रहा है?
जवाब: निगरानी बढ़ाई गई है, फायर वाच टावर सक्रिय किए गए हैं और त्वरित राहत दल तैनात किए गए हैं।

