China Birth Rate :- चीन में जन्मदर लगातार गिरती जा रही है और ताज़ा आंकड़ों के अनुसार यह पिछले 75 वर्षों से अधिक समय के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है। घटती जन्मदर ने दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के सामने जनसंख्या संतुलन, श्रमबल और आर्थिक विकास से जुड़ी नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि विवाह में देरी, बच्चों के पालन-पोषण की बढ़ती लागत, महंगे आवास, शिक्षा और स्वास्थ्य खर्च के कारण युवा दंपतियों में परिवार बढ़ाने की इच्छा कम हो रही है। इसके अलावा, लंबे समय तक लागू रही ‘वन-चाइल्ड पॉलिसी’ के प्रभाव भी अब जनसांख्यिकीय संरचना पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं।
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हाल के वर्षों में चीन सरकार ने जन्मदर बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए हैं। इनमें तीन बच्चों तक की अनुमति, परिवारों के लिए प्रोत्साहन योजनाएं, टैक्स राहत और मातृत्व लाभ जैसी नीतियां शामिल हैं। हालांकि, इन उपायों का अब तक अपेक्षित असर देखने को नहीं मिला है।
जनसंख्या विशेषज्ञों का कहना है कि जन्मदर में लगातार गिरावट से आने वाले वर्षों में कामकाजी आबादी कम हो सकती है, जबकि बुजुर्गों की संख्या तेजी से बढ़ेगी। इससे सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और पेंशन व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ने की आशंका है।
आर्थिक विश्लेषकों के अनुसार, यदि यह रुझान जारी रहता है तो चीन के विनिर्माण क्षेत्र, उपभोक्ता बाजार और दीर्घकालिक आर्थिक वृद्धि पर भी प्रभाव पड़ सकता है। यही कारण है कि चीन की सरकार जनसंख्या वृद्धि को प्रोत्साहित करने के लिए नई नीतियों और सुधारों पर लगातार विचार कर रही है।
फिलहाल, जन्मदर में आई यह ऐतिहासिक गिरावट चीन के लिए एक महत्वपूर्ण जनसांख्यिकीय चुनौती मानी जा रही है, जिस पर दुनिया भर के अर्थशास्त्रियों और नीति विशेषज्ञों की नजर बनी हुई है।