म्यांमार भूकंप 2025 ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। 28 मार्च 2025 को आए 7.7 तीव्रता के इस शक्तिशाली भूकंप ने मांडले, सागाइंग और आसपास के क्षेत्रों में भारी नुकसान पहुंचाया। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने अपने उन्नत कार्टोसैट-3 उपग्रह की सहायता से प्रभावित क्षेत्रों की उच्च-रिज़ॉल्यूशन तस्वीरें जारी की हैं। इन तस्वीरों से आपदा की वास्तविक स्थिति का आकलन करने में मदद मिली है। ISRO के अनुसार, भूकंप का केंद्र सागाइंग-मांडले क्षेत्र में लगभग 10 किलोमीटर की गहराई पर था। मुख्य झटके के बाद कई आफ्टरशॉक भी महसूस किए गए। परिणामस्वरूप, कई ऐतिहासिक इमारतें, पुल और आवासीय संरचनाएं क्षतिग्रस्त हो गईं। मांडले शहर में सबसे अधिक नुकसान दर्ज किया गया। वहीं, इरावदी नदी पर स्थित ऐतिहासिक अवा पुल के ध्वस्त होने की भी खबर सामने आई।
विशेषज्ञों का मानना है कि उपग्रह चित्र राहत और बचाव कार्यों को तेज करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। साथ ही, इनसे प्रभावित क्षेत्रों की सटीक पहचान संभव हो पाती है। Sunil Sharma | The Morning Star की यह रिपोर्ट उपलब्ध आधिकारिक जानकारी और ISRO द्वारा साझा किए गए आंकड़ों पर आधारित है।
FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)
Q1. म्यांमार में भूकंप कब आया था?
28 मार्च 2025 को म्यांमार में 7.7 तीव्रता का भूकंप आया था।
Q2. ISRO ने कौन-सा उपग्रह इस्तेमाल किया?
ISRO ने कार्टोसैट-3 उपग्रह से प्रभावित क्षेत्रों की तस्वीरें प्राप्त कीं।
Q3. सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र कौन-सा रहा?
मांडले और सागाइंग क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित बताए गए हैं।
Q4. उपग्रह चित्रों का क्या महत्व है?
इनसे नुकसान का आकलन और राहत कार्यों की योजना बनाने में सहायता मिलती है।
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