नेशनल वन हेल्थ मिशन बैठक में अजय के. सूद
विज्ञान धारा का विशेष संस्करण विमोचन कार्यक्रम

वन हेल्थ मिशन को सफल बनाने में राज्यों की भागीदारी अहम: प्रो. अजय के. सूद

वन हेल्थ मिशन में राज्यों की सक्रिय भागीदारी से बनेगा समग्र स्वास्थ्य मॉडल

नई दिल्ली: हाल ही में भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. अजय के. सूद की अध्यक्षता में नेशनल वन हेल्थ मिशन की वैज्ञानिक संचालन समिति की दूसरी बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में वन हेल्थ मिशन की प्रमुख पहलों, रणनीतियों और राज्य सरकारों की सक्रिय भागीदारी पर विशेष ध्यान दिया गया।


क्या है वन हेल्थ मिशन?

वन हेल्थ मिशन एक समग्र सार्वजनिक स्वास्थ्य दृष्टिकोण है, जिसमें मनुष्य, पशु और पर्यावरण के स्वास्थ्य को एकीकृत तरीके से संबोधित किया जाता है। यह मिशन बहु-मंत्रालयी और बहु-हितधारक सहयोग पर आधारित है, जिसका उद्देश्य उभरते संक्रमण, महामारी, एंटीमाइक्रोबियल प्रतिरोध, और जलवायु परिवर्तन जैसे जटिल स्वास्थ्य संकटों से निपटना है।


बैठक की मुख्य बातें

राज्यों की भागीदारी को बताया गया अहम

बैठक में गुजरात और केरल जैसे राज्यों ने अपनी पहलें प्रस्तुत कीं, जिनमें उन्होंने वन हेल्थ शासन मॉडल, स्वास्थ्य निगरानी प्रणाली और क्षेत्रीय सहयोग का विवरण दिया।

प्रो. सूद ने कहा,
“वन हेल्थ मॉडल तभी सफल हो सकता है जब राज्य सरकारें स्थानीय स्तर पर योजनाओं को अपनाएं और उन्हें लागू करें।”


विज्ञान धारा और परिचयात्मक वीडियो का विमोचन

इस बैठक में विज्ञान धाराका एक विशेष संस्करण लॉन्च किया गया, जो वन हेल्थ मिशन की विचारधारा, सहयोगी दृष्टिकोण और राष्ट्रीय हितधारकों की भूमिका को उजागर करता है। इसके साथ एक परिचयात्मक वीडियो भी जारी किया गया जो मिशन के विज़न और लक्ष्य को दर्शाता है।


क्रॉस-लर्निंग और पायलट प्रोग्राम

राज्यों को विभिन्न पायलट प्रोग्रामों की रणनीति बनाने और उन्हें लागू करने के लिए प्रोत्साहित किया गया। इसके अंतर्गत क्रॉस-लर्निंग प्लेटफॉर्म की बात भी सामने आई, जहां एक राज्य की सफल रणनीति को अन्य राज्यों के साथ साझा किया जा सकेगा।


प्रस्तावित अनुसंधान और विकास क्षेत्र

  • निगरानी प्रणाली (Disease Surveillance Models)
  • वन हेल्थ से संबंधित रोगों के लिए टीके
  • डायग्नोस्टिक्स और मोनोक्लोनल एंटीबॉडीज़
  • पशु रोगों की रोकथाम और नियंत्रण रणनीतियां
  • सार्वजनिक जागरूकता और शिक्षा अभियान

पशु रोगों पर मॉक ड्रिल की योजना

बैठक में यह भी सुझाव दिया गया कि समय-समय पर पशु रोगों की मॉक ड्रिल आयोजित की जाए ताकि किसी महामारी के समय सभी एजेंसियां एकजुट होकर कार्य कर सकें।


सभी हितधारकों से सहयोग का आह्वान

प्रो. अजय के. सूद ने सभी वैज्ञानिक, नीति निर्माता, राज्य सरकारों, अनुसंधान संस्थानों और निजी क्षेत्र से आग्रह किया कि वे इस मिशन की सफलता के लिए निरंतर सहयोग, नवाचार और अनुकूलनशीलता बनाए रखें।

उन्होंने कहा,
“वन हेल्थ दृष्टिकोण महामारी की रोकथाम से कहीं अधिक है; यह सतत् विकास और सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा का मूल आधार बन सकता है।”

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