आत्मनिर्भर भारत में महिला सशक्तिकरण: एक क्रांतिकारी परिवर्तन

"प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीते 11 वर्षों में भारत में महिला सशक्तिकरण को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा गया है। अब महिलाएं केवल योजनाओं की लाभार्थी नहीं, बल्कि भारत के सामाजिक और आर्थिक बदलाव की सक्रिय निर्माता बन गई हैं।"


महिला सशक्तिकरण से राष्ट्र निर्माण तक

सरकार ने जीवनचक्र आधारित नीति के तहत महिलाओं के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और नेतृत्व को प्राथमिकता दी है। ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’, ‘मिशन शक्ति’ और ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ जैसी योजनाओं ने महिलाओं को समाज में सम्मान और आत्मविश्वास दिलाया है।


सामाजिक सुरक्षा और गरिमा में बढ़ोतरी

  • प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY-G): बनाए गए 2.75 करोड़ घरों में से 73% महिलाओं के नाम पर हैं।
  • उज्ज्वला योजना: 10.33 करोड़ महिलाओं को मुफ्त LPG कनेक्शन मिला।
  • स्वच्छ भारत मिशन: 12 करोड़ से अधिक शौचालयों के निर्माण से महिला सम्मान और सुरक्षा में सुधार हुआ।
  • जल जीवन मिशन: नल जल कनेक्शन पाने वाले परिवारों की संख्या 2019 के 3.23 करोड़ से बढ़कर 15.6 करोड़ हो गई है।

स्वास्थ्य और पोषण में आत्मनिर्भरता

  • मिशन पोषण 2.0: 1.81 लाख करोड़ की लागत से 24,533 सक्षम आंगनवाड़ी केंद्र तैयार, 4.65 लाख कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित किया गया।
  • JSSK: 16.6 करोड़ महिलाओं को मातृत्व सुविधा मिली।
  • जननी सुरक्षा योजना: 11.07 करोड़ लाभार्थी।
  • सुमन योजना: 90,015 स्वास्थ्य केंद्र अधिसूचित।
  • पीएम मातृत्व वंदना योजना: ₹5,000 की आर्थिक मदद गर्भवती महिलाओं को।

शिक्षा और डिजिटल साक्षरता में योगदान

  • बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ: बाल लिंगानुपात 918 से बढ़कर 930 हुआ।
  • बालिकाओं का नामांकन: 75.5% से बढ़कर 78%।
  • सुकन्या समृद्धि योजना: 4.2 करोड़ खाते खोले गए।
  • महिलाएं अब NDA, पुलिस और सेना में भी शामिल हो रही हैं।

अंतरिक्ष, विज्ञान और तकनीक में नेतृत्व

  • चंद्रयान-3: महिला वैज्ञानिकों की बड़ी भूमिका रही।
  • भारत में सबसे ज्यादा महिला पायलट हैं।
  • STEM क्षेत्रों में महिलाएं अग्रणी भूमिका निभा रही हैं।

आर्थिक स्वतंत्रता और स्वरोजगार की ओर

  • प्रधानमंत्री मुद्रा योजना: ₹33.33 लाख करोड़ के 68% ऋण महिलाओं को।
  • स्टैंड-अप इंडिया: ₹47,704 करोड़ के 2.04 लाख ऋण महिलाओं को।
  • NRLM: 10.05 करोड़ महिलाएं SHGs में संगठित।
  • लखपति दीदी योजना: 1.48 करोड़ महिलाएं सालाना ₹1 लाख से अधिक कमा रही हैं।

नेतृत्व और राजनीति में भागीदारी

  • नारी शक्ति वंदन अधिनियम: लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को 33% आरक्षण।
  • पंचायती राज संस्थाओं में महिला नेतृत्व पहले से मौजूद है, अब संसद तक विस्तार हो रहा है।

सुरक्षा और संरक्षण के प्रयास

  • मिशन शक्ति (संबल और समर्थ्य):
    • 819 वन स्टॉप सेंटर से 10.98 लाख महिलाओं को मदद।
    • हेल्पलाइन 112 से 85.32 लाख महिलाओं को सहायता।
    • SHe-Box पोर्टल लॉन्च – यौन उत्पीड़न शिकायतों के लिए।
  • शक्ति सदन योजना: 2.92 लाख महिलाएं लाभान्वित।
  • सखी निवास योजना: 5.07 लाख महिलाओं को आवास सुविधा।
  • #अबकोईबहानानहीं अभियान: UN Women और भारत सरकार की पहल।

कानूनी और सामाजिक सुधार

  • ट्रिपल तलाक पर रोक।
  • महिलाओं की शादी की न्यूनतम आयु बढ़ाकर 21 वर्ष करने का प्रस्ताव।
  • मातृत्व अवकाश 26 सप्ताह।
  • जम्मू-कश्मीर में धारा 35A हटाकर महिलाओं को संपत्ति अधिकार।

"आत्मनिर्भर भारत में महिला सशक्तिकरण अब महज़ एक नीति नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर सामाजिक और आर्थिक बदलाव का माध्यम बन चुका है। आज की भारतीय महिलाएं वैज्ञानिक, नेता, उद्यमी, सैनिक और शिक्षिका बनकर भारत के भविष्य का मार्गदर्शन कर रही हैं।"

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