गाजियाबाद में हरित डेटा सेंटर का शिलान्यास: आत्मनिर्भर भारत की डिजिटल शक्ति को मिलेगा नया आयाम
उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के साहिबाबाद में हरित डेटा सेंटर का शिलान्यास किया गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह की उपस्थिति में शुरू हुई यह परियोजना भारत की डिजिटल अवसंरचना को मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है। हरित डेटा सेंटर परियोजना केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (CEL) और ESDS के सहयोग से विकसित की जा रही है।
करीब 1,000 करोड़ रुपये के निवेश से बनने वाला यह हरित डेटा सेंटर 30 मेगावाट क्षमता के साथ आधुनिक तकनीकों से लैस होगा। इसमें हाई-डेंसिटी रैक, 40 जीबीपीएस फाइबर नेटवर्क, स्मार्ट कूलिंग सिस्टम, वर्षा जल संचयन और डिजास्टर रिकवरी जैसी सुविधाएं शामिल होंगी। इससे डेटा सुरक्षा, ऊर्जा दक्षता और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यह परियोजना डिजिटल इंडिया और आत्मनिर्भर भारत के विजन को मजबूत करेगी। वहीं, CEL की भूमिका की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि संस्था ने सौर ऊर्जा, रेलवे सुरक्षा, डिजिटल साक्षरता और रक्षा क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, हरित डेटा सेंटर भारत में ग्रीन टेक्नोलॉजी आधारित डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास को नई दिशा देगा। यह परियोजना रोजगार सृजन के साथ-साथ डेटा स्टोरेज और क्लाउड सेवाओं में देश की आत्मनिर्भरता को भी मजबूत करेगी।
रिपोर्ट: Sunil Sharma | The Morning Star
FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)
Q1. हरित डेटा सेंटर कहाँ स्थापित किया जा रहा है?
उत्तर: यह हरित डेटा सेंटर गाजियाबाद के साहिबाबाद में स्थापित किया जा रहा है।
Q2. इस परियोजना में कितना निवेश किया जा रहा है?
उत्तर: परियोजना में लगभग 1,000 करोड़ रुपये का निवेश किया जा रहा है।
Q3. हरित डेटा सेंटर की क्षमता कितनी होगी?
उत्तर: इसकी कुल क्षमता 30 मेगावाट होगी।
Q4. इस परियोजना से क्या लाभ होंगे?
उत्तर: इससे डिजिटल अवसंरचना मजबूत होगी, रोजगार बढ़ेगा और डेटा सुरक्षा में सुधार होगा।
Q5. हरित डेटा सेंटर को ‘ग्रीन’ क्यों कहा जाता है?
उत्तर: क्योंकि इसमें ऊर्जा दक्ष तकनीक, स्मार्ट कूलिंग और वर्षा जल संचयन जैसी पर्यावरण-अनुकूल सुविधाएं शामिल हैं।
