ट्रंप दौरे के बाद मजबूत हुई चीन-रूस रणनीति | दुनिया को दिया बड़ा संदेश
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की चीन यात्रा के तुरंत बाद Xi Jinping और Vladimir Putin की बीजिंग में हुई मुलाकात ने वैश्विक राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। इस बैठक को चीन-रूस रणनीति का बड़ा संकेत माना जा रहा है। दोनों नेताओं ने अपने संबंधों को “अटूट” बताते हुए बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था की जरूरत पर जोर दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि चीन-रूस रणनीति अब केवल कूटनीतिक सहयोग तक सीमित नहीं रही।
ऊर्जा, तकनीक और रक्षा जैसे क्षेत्रों में भी दोनों देश तेजी से करीब आ रहे हैं। यूक्रेन युद्ध और पश्चिमी प्रतिबंधों के बाद चीन, रूस का सबसे बड़ा आर्थिक साझेदार बन चुका है। बैठक के दौरान तेल, गैस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। दोनों देशों ने अमेरिका की ‘गोल्डन डोम’ मिसाइल योजना पर भी चिंता जताई। इससे साफ संकेत मिला कि चीन-रूस रणनीति आने वाले समय में वैश्विक शक्ति संतुलन को प्रभावित कर सकती है।
FAQ
प्रश्न 1: चीन-रूस रणनीति क्यों चर्चा में है?
ट्रंप की चीन यात्रा के बाद पुतिन की बीजिंग यात्रा को बड़ा कूटनीतिक संकेत माना जा रहा है।
प्रश्न 2: चीन और रूस किन क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा रहे हैं?
दोनों देश ऊर्जा, तकनीक, एआई और रक्षा क्षेत्र में सहयोग मजबूत कर रहे हैं।

