दुनिया एक बार फिर खतरे की दहलीज पर खड़ी है। डूम्सडे क्लॉक अब आधी रात से केवल 85 सेकंड दूर है। यह स्थिति अब तक की सबसे चिंताजनक मानी जा रही है। परमाणु वैज्ञानिकों के अनुसार यह संकेत है कि मानव सभ्यता अपने ही फैसलों से विनाश के बेहद करीब पहुंच चुकी है। यह आकलन Bulletin of the Atomic Scientists द्वारा किया गया है, जो वैश्विक सुरक्षा हालात पर नजर रखती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका, रूस और चीन जैसे परमाणु शक्ति संपन्न देशों के बीच बढ़ता तनाव को आगे बढ़ाने का बड़ा कारण है। हथियार नियंत्रण समझौतों का कमजोर होना, यूक्रेन और मध्य पूर्व के युद्ध हालात को और अस्थिर बना रहे हैं। इसके साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का अनियंत्रित इस्तेमाल भी खतरा बनता जा रहा है। सैन्य सिस्टम में AI के बढ़ते प्रयोग से गलत फैसलों का जोखिम बढ़ गया है। जलवायु परिवर्तन भी एक बड़ा कारण है, जो धीरे-धीरे वैश्विक संकट का रूप ले रहा है।
डूम्सडे क्लॉक कोई असली घड़ी नहीं है। यह एक प्रतीक है, जो बताता है कि दुनिया कितनी असुरक्षित हो चुकी है। आधी रात का मतलब है वैश्विक तबाही, जिससे बचना मुश्किल हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर वैश्विक नेतृत्व समय रहते ठोस कदम उठाए, तो हालात सुधर सकते हैं। यही संदेश यह घड़ी पूरी दुनिया को देती है।
— The Morning Star | Sunil Sharma
FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)
प्रश्न 1: डूम्सडे क्या है?
उत्तर: डूम्सडे क्लॉक एक प्रतीकात्मक घड़ी है, जो वैश्विक विनाश के खतरे को दर्शाती है।
प्रश्न 2: डूम्सडे 85 सेकंड क्यों दूर है?
उत्तर: परमाणु तनाव, युद्ध, AI खतरे और जलवायु परिवर्तन इसके मुख्य कारण हैं।
प्रश्न 3: क्या डूम्सडे क्लॉक पीछे भी जा सकती है?
उत्तर: हां, अगर दुनिया सुरक्षित दिशा में कदम उठाए तो इसे पीछे किया जा सकता है।

