दीवाली कैसे मनाएँ: पूजा विधि, तैयारी और शुभ समय
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दीवाली कैसे मनाएँ: पूजा विधि, तैयारी

दीवाली कैसे मनाएँ — पूजा-पाठ की रस्में और तैयारी

यह पेज सरल चरणों में बताता है कि घर पर दीवाली पूजा कैसे करें, दीवाली क्यों मनाई जाती है, पूजा सामग्री और अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न।

दीवाली क्यों मनाई जाती है?
दीवाली (Diwali) प्रकाश और अंधकार के बीच विजय का त्योहार है। हिन्दू परंपरा में इसे प्रमुख रूप से भगवान राम के अयोध्या लौटने पर मनाया जाता है — जब लोगों ने दीप जलाकर उनका स्वागत किया था। इसके अलावा यह माँ लक्ष्मी—समृद्धि की देवी—का भी पर्व है; व्यापारियों के लिए नए आर्थिक वर्ष की शुरुआत के रूप में भी इसे महत्व दिया जाता है। यह अच्छाई की बुराई पर विजय, ज्ञान का प्रकाश और परिवार-समृद्धि का प्रतीक है।
दीवाली पूजा-पाठ की मुख्य रस्में (सरल कदम)

  1. साफ-सफाई: घर को अच्छी तरह साफ करें और दरवाज़ों पर रंगोली/दीप सजाएँ।
  2. पूजा स्थल तैयार करें: पूजा स्थल को सफेद कपड़े से ढककर साफ रखें, चौकी पर देवी-देवताओं की प्रतिमाएँ/चित्र रखें।
  3. पूजा सामग्री रखें: (नीचे ‘आवश्यक चीज़ें’ देखें)।
  4. प्रारम्भिक मंत्र और दीप प्रज्ज्वलन: छोटे-छोटे दीप जलाएँ और घर के हर कोने में प्रकाश फैलाएँ।
  5. लक्ष्मी पूजन: मंत्रों के साथ नारियल, रोली, अक्षत, फूल, मिश्री चढ़ाएँ; दिया/आरती करें।
  6. भोज/मिठाई बाँटना: पूजा के बाद परिवार और पड़ोसियों में प्रसाद/मिठाई बाँटें।
आवश्यक पूजा सामग्री

  • धूप, अगरबत्ती, दीपक (दीये)
  • फूल और गुलाल/रोली
  • नारियल, फल, मिश्री या चीनी
  • चावल (अक्षत), हल्दी, कुंकुम
  • चौकी/छोटा मंच, सफ़ेद कपड़ा
  • प्रसाद और मिठाई
  • घी (दीप जलाने के लिए) या दीपक तेल
घरेलू विधि — संक्षेप में

  1. सुबह/शाम को स्नान करें और साफ कपड़े पहनें।
  2. पूजा स्थल को सजाएँ, देव प्रतिमा/चित्र रखें।
  3. घी/तेल के दीप जलाएँ और प्रथम आरती करें।
  4. लक्ष्मी-गणेश को रोली, अक्षत, मिश्री अर्पित करें।
  5. आरती के बाद प्रसाद सभी में बांटें और घर के दरवाज़ों पर दीये रखें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. दीवाली किस दिन मनाई जाती है?
    दीवाली हिन्दू पंचांग के अनुसार कार्तिक मास की अमावस्या (अन्तिम दिन) को मनाई जाती है — हर साल Gregorian कैलेंडर के अनुसार तारीख बदलती है।
2. क्या लक्ष्मी पूजा घर पर सरल तरीके से की जा सकती है?
    हां — सरल पूजा में दीप, फूल, रोली, अक्षत और कुछ प्रसाद से लक्ष्मी-पूजा की जा सकती है। जो पारंपरिक मंत्र परिवार में रहे उन्हें पढ़ें या किसी पुजारी से मार्गदर्शन लें।
3. दीये और पटाखे जलाना चाहिए या नहीं?
    दीयों से प्रकाश अवश्य फैलाएँ — पर पटाखों के मामले में स्थानीय नियम और पर्यावरण-स्वास्थ्य को ध्यान में रखें। कई लोग शांतिपूर्ण और पर्यावरण-मित्र विकल्प चुनते हैं।
© — यह मार्गदर्शिका सामान्य जानकारी के लिए है। धार्मिक रीति-रिवाज परिवार/समुदाय के अनुसार अलग हो सकते हैं।
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