गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान कर्तव्य पथ पर प्रस्तुत जम्मू-कश्मीर झांकी ने देशभर के दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। इस झांकी ने क्षेत्र की समृद्ध परंपराओं, लोक कलाओं और सांस्कृतिक विविधता को प्रभावशाली ढंग से सामने रखा। सांस्कृतिक प्रस्तुति को लेकर झांकी को व्यापक सराहना मिली। गणतंत्र दिवस के एक दिन बाद केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने झांकी दल के लिए चाय पार्टी का आयोजन किया। इस दौरान उन्होंने कलाकारों और डिजाइन टीम से संवाद किया। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर झांकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस दृष्टिकोण को दर्शाती है, जिसमें विकास की नींव भारत की सांस्कृतिक विरासत में निहित है।
झांकी की शुरुआत भव्य नक्काशीदार कश्मीरी समोवर से हुई। इसके बाद पारंपरिक लकड़ी की वास्तुकला और हाउसबोट की झलक दिखाई गई। डोगरा छज्जे ने जम्मू क्षेत्र के सामुदायिक जीवन को दर्शाया। बैंगनी रंग के लैवेंडर के खेत और बाशोली की लघु चित्रकला ने झांकी को कलात्मक गहराई दी। लोक नृत्य रौफ, कुड, गोजरी और दुमहाल ने प्रस्तुति में ऊर्जा का संचार किया। पेपर माशे की रंगीन कलाकृतियों ने जम्मू-कश्मीर को रचनात्मकता के केंद्र के रूप में प्रस्तुत किया।
The Morning Star | Sunil Sharma के अनुसार, जम्मू-कश्मीर झांकी ने यह स्पष्ट किया कि सांस्कृतिक गौरव और आधुनिक विकास साथ-साथ आगे बढ़ सकते हैं।
FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)
प्रश्न 1: जम्मू-कश्मीर झांकी की थीम क्या थी?
उत्तर: झांकी की थीम सांस्कृतिक विरासत, लोक कला और सामुदायिक जीवन पर आधारित थी।
प्रश्न 2: झांकी में कौन-कौन से लोक नृत्य दिखाए गए?
उत्तर: रौफ, कुड, गोजरी, दुमहाल और पहाड़ी लोक नृत्य शामिल थे।
प्रश्न 3: झांकी का मुख्य संदेश क्या था?
उत्तर: सांस्कृतिक आत्मविश्वास के साथ विकास को आगे बढ़ाने का संदेश।

