नोएडा और गाजियाबाद में हुए विरोध प्रदर्शन के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए श्रमिक मजदूरी बढ़ोतरी का ऐलान किया है। सरकार ने एक अप्रैल से लागू अंतरिम दरों में 21 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की है, जिससे लाखों श्रमिकों को राहत मिलने की उम्मीद है।
नई व्यवस्था के तहत गौतमबुद्ध नगर और गाजियाबाद में अकुशल श्रमिकों की मजदूरी 13,690 रुपये, अर्द्धकुशल की 15,059 रुपये और कुशल श्रमिकों की 16,868 रुपये तय की गई है। वहीं अन्य नगर निगम जिलों में यह बढ़ोतरी करीब 15 प्रतिशत और बाकी जिलों में लगभग 10 प्रतिशत रखी गई है। यह श्रमिक मजदूरी बढ़ोतरी महंगाई के दबाव को देखते हुए की गई है।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि सोशल मीडिया पर फैल रही 20,000 रुपये न्यूनतम मजदूरी की खबरें भ्रामक हैं। फिलहाल यह केवल अंतरिम राहत है। साथ ही आने वाले समय में वेज बोर्ड की सिफारिशों के आधार पर स्थायी मजदूरी तय की जाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम श्रमिकों की आर्थिक स्थिति सुधारने के साथ-साथ उद्योगों में उत्पादकता बढ़ाने में भी मदद करेगा।
FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)
Q1. श्रमिक मजदूरी बढ़ोतरी कब से लागू हुई है?
यह बढ़ोतरी 1 अप्रैल से लागू की गई है।
Q2. किन जिलों में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी हुई है?
गौतमबुद्ध नगर और गाजियाबाद में 21% तक बढ़ोतरी हुई है।
Q3. क्या न्यूनतम मजदूरी 20,000 रुपये कर दी गई है?
नहीं, सरकार ने इस खबर को पूरी तरह भ्रामक बताया है।