दिल की बीमारी को अब तक उम्र से जुड़ी समस्या माना जाता रहा है, लेकिन हालिया शोध इस धारणा को तोड़ता है। नई रिसर्च के अनुसार पुरुषों में दिल की बीमारी का खतरा महिलाओं की तुलना में करीब 7 से 10 साल पहले ही बढ़ने लगता है। यह जानकारी युवाओं के लिए खास तौर पर अहम है।
The Morning Star | Sunil Sharma की हेल्थ रिपोर्ट के मुताबिक, बदलती जीवनशैली के बावजूद यह अंतर अब भी बना हुआ है।
शोध में पाया गया कि 30 साल की उम्र तक पहुंचते-पहुंचते पुरुषों और महिलाओं के बीच दिल की सेहत को लेकर साफ फर्क दिखने लगता है। पुरुषों में कोरोनरी हार्ट डिजीज की प्रक्रिया जल्दी शुरू हो जाती है। इसका कारण केवल कोलेस्ट्रॉल या ब्लड प्रेशर नहीं है, बल्कि हार्मोनल अंतर, तनाव और जैविक कारण भी हैं।
आज के समय में धूम्रपान, हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज दोनों में समान रूप से देखे जा रहे हैं। इसके बावजूद पुरुषों में दिल की बीमारी का खतरा पहले बढ़ता है। आंकड़े बताते हैं कि पुरुषों में हृदय रोग का जोखिम 5 प्रतिशत तक पहुंचने में महिलाओं से लगभग 7 साल कम लगते हैं। वहीं, कोरोनरी हार्ट डिजीज का खतरा तो एक दशक पहले ही दिखाई देने लगता है।
इसका साफ मतलब है कि पुरुषों को 40 या 50 का इंतजार नहीं करना चाहिए। युवावस्था से ही नियमित जांच, संतुलित आहार और सक्रिय जीवनशैली अपनाना बेहद जरूरी है। समय रहते उठाया गया एक छोटा कदम भविष्य में बड़े खतरे को टाल सकता है।
FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)
Q1. पुरुषों में दिल की बीमारी का खतरा कब से बढ़ने लगता है?
30 साल की उम्र से पहले ही इसके संकेत दिखने लगते हैं।
Q2. क्या केवल खराब लाइफस्टाइल ही वजह है?
नहीं, जैविक और हार्मोनल कारण भी बड़ी भूमिका निभाते हैं।
Q3. क्या युवा पुरुषों को हार्ट चेकअप कराना चाहिए?
हां, 25 साल के बाद नियमित जांच फायदेमंद रहती है।

