मेनोपॉज के बाद सर्वाइकल कैंसर को लेकर महिलाओं में कई गलतफहमियां हैं। अक्सर यह माना जाता है कि पीरियड्स बंद होने के बाद इस बीमारी का खतरा भी खत्म हो जाता है, जबकि सच्चाई इसके उलट है। विशेषज्ञों के अनुसार, मेनोपॉज के बाद शरीर में होने वाले हार्मोनल और इम्युनिटी से जुड़े बदलाव सर्वाइकल कैंसर के जोखिम को बढ़ा सकते हैं।
मेनोपॉज के बाद एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर कम हो जाता है। यह हार्मोन सर्वाइकल और योनि क्षेत्र को संक्रमणों से बचाने में मदद करता है। जब इसकी मात्रा घटती है, तो स्थानीय इम्युनिटी कमजोर पड़ सकती है। इसका सीधा असर HPV संक्रमण पर पड़ता है, जो सर्वाइकल कैंसर का मुख्य कारण माना जाता है।
आमतौर पर मजबूत इम्युनिटी HPV वायरस को शरीर से बाहर कर देती है। लेकिन उम्र बढ़ने के साथ यह क्षमता कम हो जाती है। कई मामलों में पुराना HPV संक्रमण दोबारा सक्रिय हो सकता है, जिससे मेनोपॉज के बाद सर्वाइकल कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।
इसलिए जरूरी है कि महिलाएं मेनोपॉज के बाद भी नियमित पैप स्मीयर और HPV टेस्ट कराती रहें। समय पर जांच से कैंसर को शुरुआती चरण में ही रोका जा सकता है। स्वस्थ जीवनशैली, धूम्रपान से दूरी और इम्युनिटी को मजबूत रखना भी बचाव में अहम भूमिका निभाता है। The Morning Star | Sunil Sharma
FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)
Q1. क्या कैंसर हो सकता है?
हां, मेनोपॉज के बाद भी सर्वाइकल कैंसर हो सकता है, खासकर अगर HPV संक्रमण लंबे समय तक बना रहे।
Q2. क्या स्क्रीनिंग जरूरी है?
बिल्कुल। पैप स्मीयर और HPV टेस्ट समय पर कराना बहुत जरूरी है।
Q3. क्या HPV वैक्सीन फायदेमंद है?
HPV वैक्सीन सर्वाइकल कैंसर से बचाव में बेहद प्रभावी मानी जाती है।

