National news :- वैश्विक संकट के बीच भारत ने ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में बढ़ाया बड़ा कदम, बाड़मेर रिफाइनरी का उद्घाटन करेंगे प्रधानमंत्री मोदी

National news :- वैश्विक स्तर पर जारी भू-राजनीतिक तनाव, विशेषकर रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के बीच भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में लगातार कदम उठा रहा है। इसी क्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को राजस्थान के बाड़मेर जिले के पचपदरा स्थित एचआरआरएल (HPCL Rajasthan Refinery Limited) की अत्याधुनिक ग्रीनफील्ड रिफाइनरी एवं पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स का राष्ट्र को समर्पित करेंगे। यह परियोजना भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।

 

करीब ₹79 हजार करोड़ से अधिक की लागत से विकसित यह देश की पहली ग्रीनफील्ड इंटीग्रेटेड रिफाइनरी एवं पेट्रोकेमिकल परियोजनाओं में शामिल है। इसकी वार्षिक कच्चे तेल प्रसंस्करण क्षमता लगभग 90 लाख मीट्रिक टन है, जिससे पेट्रोल, डीजल और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों के घरेलू उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है।

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विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में यह परियोजना भारत की ईंधन आपूर्ति को अधिक सुरक्षित और स्थिर बनाएगी। कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने के साथ-साथ देश के पश्चिमी क्षेत्र में औद्योगिक विकास को भी नई गति मिलेगी। इससे पेट्रोकेमिकल उद्योग को बढ़ावा मिलेगा और विभिन्न क्षेत्रों में निवेश के नए अवसर पैदा होंगे।

रिफाइनरी के संचालन से राजस्थान में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर सृजित होने की संभावना है। निर्माण कार्य के दौरान भी हजारों लोगों को रोजगार मिला, जबकि अब इसके पूर्ण संचालन के बाद स्थानीय अर्थव्यवस्था को दीर्घकालिक लाभ मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक स्तर पर तेल आपूर्ति प्रभावित होने की स्थिति में ऐसी आधुनिक रिफाइनरियां देश को ईंधन उपलब्धता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इससे परिवहन, कृषि, उद्योग और आम उपभोक्ताओं के लिए ईंधन आपूर्ति अधिक व्यवस्थित रह सकेगी।

प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा केवल एक रिफाइनरी के उद्घाटन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे भारत के ऊर्जा क्षेत्र, औद्योगिक विकास और आत्मनिर्भर भारत अभियान को नई गति देने वाले महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले वर्षों में यह परियोजना देश की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के साथ-साथ राजस्थान को औद्योगिक मानचित्र पर नई पहचान दिलाने में भी अहम भूमिका निभा सकती है।

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