Sunil Sharma | The Morning Star पाकिस्तान इस समय जिस दौर से गुजर रहा है, उसे विशेषज्ञ पाकिस्तान आंतरिक सुरक्षा संकट का सबसे गंभीर चरण मान रहे हैं। देश में बढ़ती उग्रवादी हिंसा, कमजोर आंतरिक व्यवस्था और असफल सैन्य रणनीति ने हालात को और जटिल बना दिया है। सेना प्रमुख आसिम मुनीर के नेतृत्व में सुरक्षा बल लगातार अभियानों में जुटे हैं, लेकिन इसके बावजूद हिंसा की घटनाओं में कमी नहीं आई है।
2025 के दौरान पाकिस्तान में हजारों उग्रवादी हमले दर्ज किए गए। इन घटनाओं में आम नागरिकों के साथ-साथ सुरक्षाकर्मियों की भी बड़ी संख्या में जान गई। पाकिस्तान आंतरिक सुरक्षा संकट का सबसे ज्यादा असर खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान में देखने को मिला है। यहां सुरक्षा चौकियों, सरकारी प्रतिष्ठानों और बुनियादी ढांचे पर लगातार हमले हो रहे हैं। विश्लेषकों का मानना है कि केवल सैन्य कार्रवाई पर निर्भर रहना एक बड़ी रणनीतिक भूल साबित हो रही है। स्थानीय आबादी के साथ संवाद की कमी ने अविश्वास को बढ़ाया है, जिससे उग्रवादी संगठनों को समर्थन मिलने की आशंका बनी रहती है। इसके अलावा, अफगानिस्तान के साथ तनावपूर्ण संबंध भी स्थिति को संभालने में बाधा बन रहे हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि पाकिस्तान ने संतुलित नीति नहीं अपनाई तो पाकिस्तान आंतरिक सुरक्षा संकट आने वाले समय में देश की स्थिरता के लिए बड़ा खतरा बन सकता है।
FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)
Q1. पाकिस्तान आंतरिक सुरक्षा संकट का मुख्य कारण क्या है?
मुख्य कारण उग्रवाद, कमजोर सुरक्षा रणनीति और राजनीतिक संवाद की कमी माने जाते हैं।
Q2. किन इलाकों में हालात सबसे ज्यादा खराब हैं?
खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान सबसे अधिक प्रभावित प्रांत हैं।
Q3. क्या सिर्फ सैन्य कार्रवाई से समाधान संभव है?
विशेषज्ञों के अनुसार, सैन्य कार्रवाई के साथ राजनीतिक और सामाजिक संवाद भी जरूरी है।

