पराली प्रबंधन 2026 पर सीएक्यूएम के सख्त निर्देश, राज्यों को समयबद्ध कार्ययोजना लागू करने का आदेश
एनसीआर और आसपास के क्षेत्रों में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए पराली प्रबंधन 2026 को लेकर वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने सख्त वैधानिक निर्देश जारी किए हैं। आयोग ने पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश को निर्देश दिया है कि वे गेहूं की पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए अपनी राज्य कार्ययोजना का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करें।
आयोग के अनुसार, उपग्रह आंकड़ों में अप्रैल-मई 2025 के दौरान बड़ी संख्या में आग की घटनाएं दर्ज हुईं। इसी अनुभव के आधार पर पराली प्रबंधन 2026 के तहत खेत स्तर पर निगरानी, नोडल अधिकारियों की नियुक्ति और सीआरएम मशीनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है।
छोटे और सीमांत किसानों को किराया-मुक्त मशीनें देने तथा भूसे की मजबूत आपूर्ति श्रृंखला विकसित करने के निर्देश भी शामिल हैं। इसके अलावा, जिला स्तर पर ‘पराली सुरक्षा बल’ गठित कर सख्त निगरानी की जाएगी।
सीएक्यूएम ने स्पष्ट किया है कि पराली प्रबंधन 2026 की सफलता राज्यों की समयबद्ध कार्रवाई और मासिक प्रगति रिपोर्ट पर निर्भर करेगी। दिल्ली और राजस्थान से भी सहयोग की अपेक्षा की गई है।
FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)
प्रश्न 1: पराली प्रबंधन 2026 क्या है?
उत्तर: यह सीएक्यूएम की पहल है, जिसका उद्देश्य गेहूं की पराली जलाने की घटनाओं को खत्म करना है।
प्रश्न 2: किन राज्यों को निर्देश दिए गए हैं?
उत्तर: पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और राजस्थान को।
प्रश्न 3: किसानों को क्या सुविधा मिलेगी?
उत्तर: सीआरएम मशीनें, भंडारण सुविधा और जागरूकता कार्यक्रम।

