सुप्रीम कोर्ट ने महिला करियर अधिकार को लेकर बड़ा और अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने कहा कि किसी महिला का अपने करियर और पेशेवर पहचान को महत्व देना क्रूरता नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने साफ किया कि विवाह के बाद महिला अपनी स्वतंत्र पहचान नहीं खोती। यह मामला एक महिला डेंटिस्ट और सेना में कार्यरत अधिकारी पति से जुड़ा था। महिला अपनी बेटी के बेहतर इलाज और करियर के कारण अहमदाबाद में रह रही थी। पति ने इसे वैवाहिक जिम्मेदारी से दूरी बताया था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस तर्क को खारिज कर दिया।
अदालत ने कहा कि महिला करियर अधिकार का सम्मान हर परिवार और समाज को करना चाहिए। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने कहा कि पत्नी कोई वस्तु नहीं है, बल्कि उसकी अपनी सोच, सम्मान और पेशेवर पहचान होती है। कोर्ट ने यह भी माना कि आधुनिक दौर में रिश्ते बराबरी और आपसी सम्मान से चलते हैं। इसलिए किसी महिला को सिर्फ शादी के नाम पर अपने सपने छोड़ने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। इस फैसले को महिला अधिकारों की दिशा में एक मजबूत कदम माना जा रहा है।
FAQ
Q1. सुप्रीम कोर्ट ने महिला करियर अधिकार पर क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि महिला का करियर चुनना क्रूरता नहीं माना जा सकता।
Q2. यह मामला किससे जुड़ा था?
यह मामला एक महिला डेंटिस्ट और सेना अधिकारी पति के वैवाहिक विवाद से जुड़ा था।
Q3. कोर्ट ने विवाह को लेकर क्या टिप्पणी की?
कोर्ट ने कहा कि विवाह महिला की पहचान और स्वतंत्रता खत्म नहीं करता।
