भारत ने फिजी को दी कृषि सहायता, लोबिया के 5 टन बीज सौंपकर खाद्य सुरक्षा को मजबूत किया

भारत और फिजी के बीच कृषि सहयोग का नया अध्याय

“भारत ने इंडो-पैसिफिक साझेदारी की मजबूती और क्षेत्रीय सहयोग की भावना को दर्शाते हुए फिजी को मानवीय सहायता के रूप में 5 मीट्रिक टन लोबिया (काले लोबिया) के बीज सौंपे। यह बीजों की पहली खेप थी, जो फिजी के नाडी शहर में 12 अगस्त 2025 को पहुंचाई गई। इस पहल का उद्देश्य फिजी में कृषि स्थिरता को बढ़ावा देना, किसानों को समर्थन देना और खाद्य सुरक्षा को मजबूत करना है।”


भारतीय उच्चायोग का बयान

सुवा स्थित भारतीय उच्चायोग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर जानकारी दी:

“भारत सरकार की ओर से भारतीय उच्चायोग ने आज नाडी के सबेटो में फिजी सरकार को लोबिया के बीज सौंपे। यह पहल कृषि लचीलापन को मजबूत करती है, किसानों को सशक्त बनाती है और खाद्य सुरक्षा को बढ़ावा देती है।”

उच्चायोग ने बताया कि यह परियोजना फिजी की सबसे बड़ी लोबिया उत्पादन योजना है, जिससे स्थानीय किसानों को बेहतर उपज, फसलों की विविधता और आय में वृद्धि होगी। इससे ग्रामीण आजीविका पर सकारात्मक और दीर्घकालिक प्रभाव पड़ेगा।


बीजों की पहली खेप और ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’

विदेश मंत्रालय के अनुसार, बीजों की पहली खेप 26 जुलाई 2025 को दिल्ली से फिजी रवाना हुई थी। यह सहायता भारत की ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ का हिस्सा है, जिसके तहत भारत प्रशांत क्षेत्र के अपने साझेदार देशों के साथ आर्थिक, सांस्कृतिक और विकास सहयोग को बढ़ावा देता है।


भारत-फिजी के बीच हालिया सहयोग

जुलाई 2025 में भारत और फिजी के बीच सुवा में छठा विदेश कार्यालय परामर्श आयोजित हुआ था। इसमें कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, क्षमता निर्माण, व्यापार, निवेश, नवीकरणीय ऊर्जा, जलवायु परिवर्तन, लोगों के बीच संपर्क और सांस्कृतिक आदान-प्रदान जैसे क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत करने पर चर्चा हुई।

भारत लंबे समय से फिजी का एक विश्वसनीय विकास साझेदार रहा है। भारत द्वारा दी जाने वाली सहायता में शामिल हैं:

  • भारतीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग (ITEC) कार्यक्रम
  • फिजी के छात्रों के लिए शैक्षणिक छात्रवृत्ति
  • डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन प्रोजेक्ट
  • फार्मास्यूटिकल और चिकित्सा मानकों में सहयोग

किसानों के लिए संभावित लाभ

इस बीज सहायता से फिजी के किसानों को कई तरह के लाभ होंगे:

  1. बेहतर उपज — उच्च गुणवत्ता वाले बीज से उत्पादन में वृद्धि होगी।
  2. फसल विविधता — खेती में नई किस्मों को शामिल करने से जोखिम कम होगा और आय स्थिर रहेगी।
  3. आय में वृद्धि — बाजार में अधिक और गुणवत्तापूर्ण उत्पादन मिलने से किसानों की आमदनी बढ़ेगी।
  4. ग्रामीण आजीविका में सुधार — कृषि आधारित रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।

फिजी की कृषि में लोबिया की भूमिका

लोबिया (काले लोबिया) फिजी में एक प्रमुख दाल फसल है, जिसका उपयोग स्थानीय भोजन और बाजार दोनों के लिए किया जाता है। यह फसल सूखा-सहिष्णु होने के कारण जलवायु परिवर्तन से प्रभावित क्षेत्रों में खेती के लिए उपयुक्त है।

भारत द्वारा प्रदान किए गए बीज फिजी में:

  • फसल उत्पादन बढ़ाने
  • खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने
  • ग्रामीण गरीबी कम करने में मदद करेंगे।

भारत-फिजी कृषि साझेदारी का महत्व

भारत और फिजी के बीच कृषि सहयोग सिर्फ बीज आपूर्ति तक सीमित नहीं है। इसमें तकनीकी ज्ञान का आदान-प्रदान, कृषि प्रशिक्षण, और सतत खेती तकनीक का साझा करना भी शामिल है।

इस तरह के सहयोग से:

  • फिजी के किसान आधुनिक खेती पद्धतियां सीख सकेंगे।
  • दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंध मजबूत होंगे।
  • इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में कृषि स्थिरता और खाद्य सुरक्षा के साझा लक्ष्यों को आगे बढ़ाया जा सकेगा।

हालिया समझौते और भविष्य की योजनाएं

हाल ही में भारत और फिजी के बीच भारतीय फार्माकोपिया को मान्यता देने वाला समझौता ज्ञापन (MoU) भी हुआ है। यह कदम फार्मास्यूटिकल और चिकित्सा मानकों में सहयोग को दर्शाता है और भविष्य में स्वास्थ्य क्षेत्र में भी साझेदारी को मजबूत करेगा।

अगले चरण में भारत फिजी के साथ:

  • कृषि मशीनरी आपूर्ति
  • सिंचाई परियोजनाएं
  • फसल अनुसंधान और नवाचार
  • जलवायु-प्रतिरोधी कृषि योजनाएं पर काम कर सकता है।

“भारत द्वारा फिजी को लोबिया के 5 मीट्रिक टन बीज सौंपना केवल एक मानवीय सहायता नहीं, बल्कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में कृषि सहयोग और विकास की एक मजबूत मिसाल है। यह पहल न केवल किसानों के जीवन में बदलाव लाएगी, बल्कि दोनों देशों के संबंधों को और गहरा करेगी।”

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