स्वतंत्रता दिवस पर पीएम मोदी की घोषणा — इस साल बाजार में आएंगी ‘मेड इन इंडिया’ चिप्स

मेड इन इंडिया चिप्स: तकनीकी आत्मनिर्भरता की ओर बड़ा कदम

“भारत ने तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। 79वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से राष्ट्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घोषणा की कि इस साल के अंत तक ‘मेड इन इंडिया’ चिप्स बाजार में उपलब्ध होंगी। यह घोषणा देश के सेमीकंडक्टर निर्माण क्षेत्र में नए युग की शुरुआत मानी जा रही है।”


सेमीकंडक्टर निर्माण में भारत की वापसी

पीएम मोदी ने कहा कि 50-60 साल पहले भारत में सेमीकंडक्टर निर्माण का विचार शुरू हुआ था, लेकिन यह आगे नहीं बढ़ पाया। इस दौरान कई देश इस क्षेत्र में अग्रणी बन गए, जबकि भारत पीछे रह गया। अब भारत मिशन मोड में काम कर रहा है और छह सेमीकंडक्टर यूनिट्स की नींव रखी जा चुकी है।


ऊर्जा आत्मनिर्भरता पर जोर

अपने भाषण में पीएम मोदी ने ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि भारत पेट्रोल, डीजल और गैस के लिए कई देशों पर निर्भर है, जिससे हर साल लाखों-करोड़ों रुपये बाहर जाते हैं। अगर भारत ऊर्जा में आत्मनिर्भर हो जाए तो यह धन गरीबी खत्म करने और युवाओं के विकास में लगाया जा सकता है।


सौर, जल और परमाणु ऊर्जा में प्रगति

पिछले 11 वर्षों में सौर ऊर्जा उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। नए बांध बनाकर हाइड्रो पावर का विस्तार किया जा रहा है। ‘मिशन ग्रीन हाइड्रोजन’ के तहत हजारों करोड़ रुपये का निवेश हो रहा है। देश में 10 नए परमाणु रिएक्टर कार्यरत हैं और 2047 तक परमाणु ऊर्जा क्षमता को 10 गुना से अधिक बढ़ाने का लक्ष्य है।


निजी क्षेत्र के लिए अवसर

पीएम मोदी ने कहा कि ऊर्जा क्षेत्र में निजी कंपनियों के लिए भी दरवाजे खोल दिए गए हैं। इससे निवेश और नवाचार को बढ़ावा मिलेगा और भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की गति तेज होगी।


क्लीन एनर्जी लक्ष्य 2030 तक

भारत ने 2030 तक स्वच्छ ऊर्जा को पूरी तरह अपनाने का लक्ष्य रखा है। इस लक्ष्य का 50 प्रतिशत कार्य पहले ही पूरा हो चुका है। पीएम मोदी ने बताया कि अब देश समुद्र के भीतर तेल और गैस भंडार खोजने के लिए नया मिशन शुरू कर रहा है।


तकनीक और ऊर्जा में एक साथ आत्मनिर्भरता

मेड इन इंडिया चिप्स और ऊर्जा आत्मनिर्भरता — ये दोनों कदम न केवल भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूत करेंगे, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत की प्रतिस्पर्धा भी बढ़ाएंगे।
तकनीकी क्षेत्र में आत्मनिर्भरता देश को विदेशी निर्भरता से मुक्त करेगी और ऊर्जा क्षेत्र में प्रगति भविष्य की पीढ़ियों को स्वच्छ और सस्ती ऊर्जा उपलब्ध कराएगी।

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