हरिजन सेवक संघ दौरे में उपराष्ट्रपति का संदेश: गांधीवादी सेवा और सामाजिक जिम्मेदारी

Harijan Sevak Sangh भारत की एक प्रतिष्ठित सामाजिक संस्था है, जिसकी स्थापना 1932 में महात्मा गांधी द्वारा की गई थी। इस संगठन का मुख्य उद्देश्य समाज से छुआछूत, भेदभाव और असमानता को समाप्त करना रहा है। हरिजन सेवक संघ ने शुरू से ही शिक्षा, सेवा और सामाजिक जागरूकता को अपना आधार बनाया। हरिजन सेवक संघ का मानना है कि किसी व्यक्ति की पहचान उसका जन्म नहीं, बल्कि उसका चरित्र और कर्म तय करते हैं। इसी सोच के साथ यह संस्था दलित और वंचित वर्गों के उत्थान के लिए निरंतर कार्य करती आ रही है। देश के विभिन्न हिस्सों में हरिजन सेवक संघ द्वारा स्कूल, छात्रावास, पुस्तकालय और कौशल विकास केंद्र संचालित किए जाते हैं।

नई दिल्ली स्थित गांधी आश्रम में Harijan Sevak Sangh का कार्यालय ऐतिहासिक महत्व रखता है। यहां से समाज सुधार से जुड़े कई आंदोलनों को दिशा मिली। संगठन का काम केवल सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि आत्मनिर्भरता और आत्मसम्मान को बढ़ावा देना भी इसका प्रमुख लक्ष्य है। आज के समय में भी हरिजन सेवक संघ की प्रासंगिकता बनी हुई है। सामाजिक समरसता और समानता की दिशा में इसका योगदान सराहनीय माना जाता है। सामाजिक विषयों पर लिखते हुए Sunil Sharma मानते हैं कि हरिजन सेवक संघ जैसे संगठन भारतीय समाज की नैतिक नींव को मजबूत करते हैं।

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FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

प्रश्न 1: Harijan Sevak Sangh की स्थापना कब हुई?
उत्तर: Harijan Sevak Sangh की स्थापना वर्ष 1932 में हुई थी।

प्रश्न 2: Harijan Sevak Sangh का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर: इसका मुख्य उद्देश्य सामाजिक भेदभाव को समाप्त करना और वंचित वर्गों का उत्थान करना है।

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