पूरे देश में इच्छामृत्यु और मरीजों के अधिकारों पर चर्चा तेज |

देश में इच्छामृत्यु को लेकर चल रही बहस के बीच हरिश राणा इच्छामृत्यु मामला फिर सुर्खियों में आ गया है। सुप्रीम कोर्ट ने गाजियाबाद के युवक हरिश राणा के मामले में महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए उनके मेडिकल सपोर्ट सिस्टम को हटाने की अनुमति दे दी है। इस फैसले के बाद पूरे देश में इच्छामृत्यु और मरीजों के अधिकारों पर चर्चा तेज हो गई है।

जानकारी के अनुसार, हरिश राणा कई महीनों से अस्पताल में गंभीर हालत में भर्ती थे। कॉलेज के दौरान हुई एक दुर्घटना में उनके सिर पर गंभीर चोट लगी थी। इस हादसे के बाद उनके दिमाग को गहरा नुकसान पहुंचा और तब से उनकी हालत में सुधार नहीं हुआ। डॉक्टरों की टीम ने बताया कि मरीज की स्थिति बेहद गंभीर है और सामान्य जीवन में वापसी की संभावना बहुत कम है।

इसी कारण परिवार ने अदालत में याचिका दाखिल कर हरिश राणा इच्छामृत्यु मामला उठाया और जीवन रक्षक उपकरण हटाने की अनुमति मांगी। सुप्रीम कोर्ट ने मेडिकल रिपोर्ट और विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय का अध्ययन करने के बाद यह फैसला सुनाया। अदालत ने कहा कि मरीज की स्थिति को देखते हुए यह फैसला कानूनी प्रक्रिया के तहत लिया गया है।

भारत में इच्छामृत्यु को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहले भी पैसिव यूथेनेशिया को कुछ शर्तों के साथ अनुमति दे चुका है। इसी कानून के तहत हरिश राणा इच्छामृत्यु मामला अदालत के सामने आया और मेडिकल सपोर्ट हटाने की मंजूरी दी गई।

यह मामला देश में चिकित्सा नैतिकता, मरीजों के अधिकार और परिवार की भावनाओं को लेकर नई बहस भी खड़ी कर रहा है। कई विशेषज्ञ इसे मानवीय फैसला मानते हैं, जबकि कुछ लोग इसे संवेदनशील विषय बताते हैं।

इस पूरे मामले को लेकर कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में अदालत मरीज की मेडिकल स्थिति, डॉक्टरों की रिपोर्ट और परिवार की इच्छा को ध्यान में रखकर ही फैसला सुनाती है।

Sunil Sharma | The Morning Star

FAQ

1. हरिश राणा इच्छामृत्यु मामला क्या है?

यह मामला गाजियाबाद के युवक हरिश राणा से जुड़ा है |

2. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में क्या फैसला दिया?

डॉक्टरों की रिपोर्ट के आधार पर मरीज का मेडिकल सपोर्ट सिस्टम हटाने की अनुमति दी।

3. क्या भारत में इच्छामृत्यु कानूनी है?

भारत में पैसिव यूथेनेशिया कुछ शर्तों के साथ सुप्रीम कोर्ट की अनुमति से संभव है।

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