गुर्जर आरक्षण आंदोलन: कर्नल बैंसला के नेतृत्व में अधिकारों की ऐतिहासिक लड़ाई
राजस्थान का गुर्जर आरक्षण आंदोलन देश के सबसे बड़े सामाजिक आंदोलनों में गिना जाता है। इस आंदोलन ने न केवल राजस्थान की राजनीति को प्रभावित किया, बल्कि पूरे देश में आरक्षण को लेकर नई बहस छेड़ दी। स्वर्गीय Kirori Singh Bainsla के नेतृत्व में गुर्जर समाज ने विशेष पिछड़ा वर्ग (SBC) आरक्षण की मांग को लेकर बड़े स्तर पर प्रदर्शन किया। साल 2007 और 2008 में यह आंदोलन अपने चरम पर पहुंच गया। पीलूपुरा, सिकंदरा और कई अन्य इलाकों में हजारों लोग रेलवे ट्रैक और हाईवे पर उतर आए। आंदोलन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच कई जगह टकराव हुआ। इन घटनाओं में 73 आंदोलनकारियों की मौत हुई, जिसे गुर्जर समाज आज भी शहादत के रूप में याद करता है।
गुर्जर आरक्षण आंदोलन ने यह दिखाया कि सामाजिक अधिकारों और राजनीतिक भागीदारी के लिए समुदाय किस हद तक संघर्ष कर सकता है। आंदोलन के बाद सरकार को गुर्जर समाज की मांगों पर गंभीरता से विचार करना पड़ा। आज भी राजस्थान में हर वर्ष शहीद आंदोलनकारियों को श्रद्धांजलि दी जाती है।
FAQ
गुर्जर आरक्षण आंदोलन क्यों शुरू हुआ?
गुर्जर समाज ने शिक्षा और सरकारी नौकरियों में आरक्षण की मांग को लेकर आंदोलन शुरू किया था।
गुर्जर आरक्षण आंदोलन का नेतृत्व किसने किया?
इस आंदोलन का नेतृत्व कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला ने किया था।
आंदोलन में कितने लोगों की मौत हुई?
गुर्जर समाज के अनुसार आंदोलन में 73 लोगों ने अपनी जान गंवाई थी।

