डीएनए रिपोर्ट मामला | इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट का आदेश किया निरस्त

उत्तर प्रदेश के अमरोहा में चर्चित डीएनए रिपोर्ट मामला अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को निरस्त कर दिया है, जिसमें डीएनए रिपोर्ट और एफएसएल रिपोर्ट पेश कराने की मांग वाली अर्जी पर सुनवाई को टाल दिया गया था। मामला वर्ष 2015 में दर्ज एक हत्या केस से जुड़ा है। आरोपी इफ्तेखार खान का दावा है कि उसे झूठा फंसाया गया है। वहीं, मृतक की पहचान को लेकर शुरू से ही सवाल उठते रहे हैं। जांच के दौरान परिजनों ने डीएनए जांच की मांग की थी, लेकिन कथित तौर पर डीएनए रिपोर्ट अदालत के रिकॉर्ड में पेश नहीं की गई।

हाईकोर्ट ने कहा कि डीएनए रिपोर्ट मामला मुकदमे के मूल विवाद से जुड़ा हुआ है। ऐसे में इस तरह की अर्जी पर विचार करने के लिए किसी निश्चित चरण का इंतजार करना जरूरी नहीं है। अदालत ने ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया है कि वह दो माह के भीतर अभियोजन पक्ष को सुनकर आवेदन पर कानून के अनुसार फैसला करे। कानूनी जानकारों का मानना है कि यह आदेश निष्पक्ष सुनवाई और वैज्ञानिक साक्ष्यों के महत्व को मजबूत करता है। डीएनए रिपोर्ट जैसे प्रमाण कई मामलों में सच्चाई सामने लाने में अहम भूमिका निभाते हैं।

FAQ

प्रश्न: डीएनए रिपोर्ट मामला किस जिले से जुड़ा है?

उत्तर: यह मामला उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले के थाना गजरौला क्षेत्र से जुड़ा है।

प्रश्न: आरोपी पर कौन-कौन सी धाराएं लगाई गई हैं?

उत्तर: आरोपी पर हत्या, आपराधिक षड्यंत्र और साक्ष्य मिटाने से संबंधित धाराओं में मुकदमा चल रहा है।

प्रश्न: हाईकोर्ट ने क्या आदेश दिया है?

उत्तर: हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट का आदेश रद्द कर दो माह के भीतर डीएनए रिपोर्ट संबंधी आवेदन पर निर्णय लेने का निर्देश दिया है।

Prem Chand | The Morning Star

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