प्रत्यारोपित पेड़ों की दुर्दशा | दिल्ली में लापरवाही से सूख रहे सैकड़ों पेड़

दिल्ली में हरियाली बढ़ाने और पर्यावरण संरक्षण के दावे एक बार फिर सवालों के घेरे में हैं। यमुना खादर और सराय काले खां के आसपास विकास परियोजनाओं के दौरान प्रत्यारोपित किए गए कई पेड़ अब सूखने की कगार पर पहुंच चुके हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पिछले तीन महीनों से इन पेड़ों की नियमित सिंचाई और देखरेख नहीं की गई। जानकारी के अनुसार, विभिन्न विभागों ने सड़क और अन्य विकास कार्यों के दौरान पेड़ों को काटने के बजाय उनका प्रत्यारोपण किया था। फरवरी तक इन पेड़ों में नई पत्तियां दिखाई दे रही थीं, लेकिन बढ़ती गर्मी और पानी की कमी के कारण अब अधिकांश पेड़ सूखी लकड़ी में बदल चुके हैं। कई स्थानों पर जहां एक लाइन में 30 पेड़ लगाए गए थे, वहां केवल एक या दो पेड़ ही जीवित बचे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि प्रत्यारोपित पेड़ों को शुरुआती महीनों में नियमित पानी और निगरानी की आवश्यकता होती है। ऐसा नहीं होने पर उनकी जीवित रहने की संभावना काफी कम हो जाती है। इस पूरी प्रक्रिया पर लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं, इसलिए पेड़ों का सूखना सरकारी धन और पर्यावरण दोनों के लिए नुकसानदायक है। जब इस मामले में अधिकारियों से बात की गई तो उनका कहना था कि पेड़ों को बचाने की पूरी कोशिश की गई है। हालांकि स्थानीय लोगों का दावा है कि लंबे समय से कोई अधिकारी मौके पर निरीक्षण करने नहीं पहुंचा।

FAQ

प्रश्न: प्रत्यारोपित पेड़ क्या होते हैं?
उत्तर: ऐसे पेड़ जिन्हें एक स्थान से उखाड़कर दूसरी जगह लगाया जाता है।

प्रश्न: पेड़ सूखने का मुख्य कारण क्या है?
उत्तर: नियमित सिंचाई और रखरखाव का अभाव।

प्रश्न: सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र कौन से हैं?
उत्तर: यमुना खादर और सराय काले खां के आसपास के इलाके।

Prem Chand | The Morning Star

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