देश की अदालतों में लंबित मामलों की संख्या कम करने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बताया कि सरकार सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के साथ मिलकर न्याय सुधार ब्लूप्रिंट तैयार कर रही है। इसका उद्देश्य एफआईआर दर्ज होने से लेकर अंतिम फैसला आने तक की प्रक्रिया को तीन साल के भीतर पूरा करना है। मित शाह ने कहा कि देशभर की अदालतों में पांच करोड़ से अधिक मामले लंबित हैं। ऐसे में न्याय व्यवस्था को तेज और प्रभावी बनाने के लिए नई रणनीति पर काम किया जा रहा है। प्रस्तावित न्याय सुधार ब्लूप्रिंट के तहत सांध्यकालीन अदालतों की स्थापना, लंबित आपराधिक मामलों के त्वरित निपटारे और तकनीक आधारित जांच को बढ़ावा दिया जाएगा।
उन्होंने बताया कि नए आपराधिक कानून लागू होने के बाद कई मामलों में 90 दिनों के भीतर दोषियों को सजा दिलाने में सफलता मिली है। सरकार अब एआई, मशीन लर्निंग और डेटा एनालिसिस की मदद से अपराधियों के नेटवर्क की पहचान कर अपराध नियंत्रण को और मजबूत बनाना चाहती है। अमित शाह के अनुसार, देश के सभी पुलिस थानों को सीसीटीएनएस नेटवर्क से जोड़ा जा चुका है और करोड़ों रिकॉर्ड का विश्लेषण किया जा रहा है। इससे जांच प्रक्रिया में तेजी आएगी और न्याय मिलने में देरी कम होगी।
FAQ
Q1. न्याय सुधार ब्लूप्रिंट क्या है?
यह केंद्र सरकार की योजना है, जिसका उद्देश्य अदालतों में लंबित मामलों को कम करना है।
Q2. सरकार का लक्ष्य क्या है?
एफआईआर से लेकर अंतिम फैसले तक न्याय प्रक्रिया को तीन वर्षों के भीतर पूरा करना।
Q3. इसमें तकनीक की क्या भूमिका होगी?
एआई, मशीन लर्निंग और डेटा एनालिसिस के जरिए जांच और अपराध नियंत्रण को मजबूत किया जाएगा।
