भारत में सैटेलाइट संचार सेवाओं को लेकर बड़ा बदलाव होने जा रहा है। दूरसंचार विभाग (DoT) ने सैटेलाइट स्पेक्ट्रम नियम 2026 का मसौदा जारी कर दिया है। नए प्रस्ताव के तहत सैटेलाइट इंटरनेट, ब्रॉडबैंड और फोन सेवाएं शुरू करने वाली कंपनियों को लाइसेंस के साथ केंद्र सरकार से सुरक्षा मंजूरी भी लेनी होगी। मसौदे के अनुसार स्पेक्ट्रम का आवंटन नीलामी के बजाय प्रशासनिक प्रक्रिया से किया जाएगा। कंपनियों को सेवा श्रेणी के अनुसार 30 हजार रुपये से 50 लाख रुपये तक वार्षिक शुल्क देना होगा। इसके अलावा 1,000 रुपये का नॉन-रिफंडेबल आवेदन शुल्क भी निर्धारित किया गया है।
नए सैटेलाइट स्पेक्ट्रम नियम एलन मस्क की स्टारलिंक, भारती समूह समर्थित यूटेलसैट वनवेब और जियो सैटकॉम जैसी कंपनियों पर लागू होंगे। आम उपभोक्ताओं के लिए सैटेलाइट फोन और ब्रॉडबैंड सेवा शुरू करने से पहले सभी जरूरी सरकारी मंजूरियां लेना अनिवार्य होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों में इंटरनेट पहुंच बढ़ाने में मदद करेगा। साथ ही राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े पहलुओं को भी मजबूत करेगा। डीओटी ने मसौदा नियमों पर 30 दिनों के भीतर सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं।
FAQ
प्रश्न: सैटेलाइट स्पेक्ट्रम नियम क्या हैं?
उत्तर: ये नियम सैटेलाइट आधारित संचार सेवाओं के लिए स्पेक्ट्रम आवंटन और संचालन की प्रक्रिया तय करते हैं।
प्रश्न: क्या स्टारलिंक को भी सुरक्षा मंजूरी लेनी होगी?
उत्तर: हां, सभी सैटेलाइट सेवा प्रदाताओं को सुरक्षा मंजूरी लेना अनिवार्य होगा।
