अल नीनो संकट | 111 जिलों में फसलों पर खतरा, किसानों को सरकार की नई सलाह
देश में मानसून की रफ्तार धीमी पड़ने के बीच अल नीनो संकट ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि सरकार ने 315 ऐसे जिलों की पहचान की है जहां सामान्य से कम बारिश होने की आशंका है। इनमें से 111 जिले सबसे अधिक जोखिम वाले माने गए हैं, जहां फसलों को भारी नुकसान पहुंच सकता है। कृषि मंत्रालय के अनुसार इस समय देश में मानसून की बारिश सामान्य से लगभग 43 प्रतिशत कम दर्ज की गई है। मौसम विभाग का अनुमान है कि कमजोर मानसून की स्थिति कुछ और दिनों तक बनी रह सकती है। इसका असर खरीफ फसलों की बुवाई पर पड़ सकता है।
सरकार ने किसानों से अपील की है कि वे कम पानी वाली फसलों को प्राथमिकता दें। दालें, तिलहन और मोटे अनाज जैसी फसलें इस स्थिति में बेहतर विकल्प मानी जा रही हैं। इसके अलावा कम अवधि में तैयार होने वाले बीजों के उपयोग पर भी जोर दिया गया है। अल नीनो संकट को देखते हुए राज्यों को जल संरक्षण पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए हैं। तालाबों, चेक डैम और अन्य जल स्रोतों की सफाई के माध्यम से सिंचाई के लिए पानी बचाने की योजना बनाई जा रही है। |कृषि मंत्री ने भरोसा दिलाया कि किसानों के लिए बीज और उर्वरकों की पर्याप्त व्यवस्था की गई है। सरकार लगातार स्थिति की निगरानी कर रही है ताकि खेती पर पड़ने वाले असर को कम किया जा सके।
FAQ
प्रश्न 1: अल नीनो संकट क्या है?
उत्तर: यह एक जलवायु घटना है जो मानसून और वर्षा के पैटर्न को प्रभावित करती है।
प्रश्न 2: कितने जिले सबसे अधिक जोखिम में हैं?
उत्तर: कृषि मंत्रालय ने 111 जिलों को सबसे अधिक जोखिम वाली श्रेणी में रखा है।
प्रश्न 3: किसानों को कौन सी फसलें उगाने की सलाह दी गई है?
उत्तर: दालें, तिलहन और मोटे अनाज जैसी कम पानी वाली फसलें उगाने की सलाह दी गई है।
