कर्नाटक सेक्सटॉर्शन कानून | बिना अनुमति अंतरंग फोटो-वीडियो शेयर करने पर अब होगी अनिवार्य FIR
कर्नाटक सरकार ने कर्नाटक सेक्सटॉर्शन कानून को लेकर बड़ा कदम उठाया है। अब यदि किसी व्यक्ति की अंतरंग फोटो या वीडियो उसकी अनुमति के बिना साझा की जाती है, तो पुलिस के लिए एफआईआर दर्ज करना अनिवार्य होगा। यह नियम तब भी लागू रहेगा, जब वह सामग्री पहले संबंधित व्यक्ति की सहमति से रिकॉर्ड की गई हो। सरकार का स्पष्ट कहना है कि रिकॉर्डिंग की अनुमति का मतलब उसे सोशल मीडिया या किसी अन्य प्लेटफॉर्म पर साझा करने की अनुमति नहीं माना जा सकता।
नए निर्देशों के तहत पुलिस को रिवेंज पोर्न, सेक्सटॉर्शन और निजी वीडियो के जरिए ब्लैकमेल से जुड़े मामलों में तुरंत कार्रवाई करनी होगी। ऐसे मामलों में भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की जाएगी। यदि अधिकार क्षेत्र स्पष्ट नहीं है, तो पहले Zero FIR दर्ज कर मामला संबंधित थाने को भेजा जाएगा। सरकार ने पुलिस अधिकारियों को पीड़ित की पहचान गोपनीय रखने, संवेदनशील व्यवहार करने और महिला पीड़ितों की शिकायत महिला अधिकारी द्वारा दर्ज करने का निर्देश दिया है। कर्नाटक सेक्सटॉर्शन कानून का उद्देश्य डिजिटल निजता को मजबूत करना और ऑनलाइन ब्लैकमेल जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाना है।
FAQ
प्रश्न 1: कर्नाटक सेक्सटॉर्शन कानून क्या है?
यह ऐसा निर्देश है, जिसके तहत बिना अनुमति अंतरंग फोटो या वीडियो साझा करने पर अनिवार्य एफआईआर दर्ज होगी।
प्रश्न 2: क्या रिकॉर्डिंग की सहमति का मतलब शेयर करने की अनुमति है?
नहीं। सरकार ने दोनों को अलग-अलग कानूनी सहमति माना है।
