स्वच्छ स्पेस मिशन 2030: अंतरिक्ष मलबे को कम करने की दिशा में भारत की बड़ी पहल

नई दिल्ली, 6 नवंबर 2026। भारत अंतरिक्ष क्षेत्र में नई उपलब्धियां हासिल करने के साथ पर्यावरण संरक्षण पर भी ध्यान दे रहा है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने स्वच्छ स्पेस मिशन 2030 के लक्ष्य के तहत अंतरिक्ष मलबे को कम करने और भविष्य के मिशनों को सुरक्षित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की है।

स्वच्छ स्पेस मिशन 2030 का मुख्य उद्देश्य

स्वच्छ स्पेस मिशन 2030 का प्रमुख उद्देश्य अंतरिक्ष में बढ़ते मलबे को नियंत्रित करना है। निष्क्रिय उपग्रह, पुराने रॉकेट के हिस्से और अन्य उपकरण अंतरिक्ष में सक्रिय उपग्रहों के लिए खतरा बन सकते हैं।

इस चुनौती से निपटने के लिए ISRO अंतरिक्ष मलबे की निगरानी, सुरक्षित उपग्रह संचालन और मिशन समाप्त होने के बाद उपकरणों के उचित निस्तारण पर जोर दे रहा है।

भारत की अंतरिक्ष सुरक्षा को मिलेगी मजबूती

भारत ने वर्ष 2030 तक अपने अंतरिक्ष मिशनों को मलबा-मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा है।

इसका अर्थ अंतरिक्ष में मौजूद सारा पुराना मलबा समाप्त करना नहीं,

बल्कि भारतीय मिशनों से नए मलबे के निर्माण को रोकना है।

इसके अलावा, बेहतर ट्रैकिंग तकनीक और टक्कर से बचाव की रणनीतियां भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों को अधिक सुरक्षित बना सकती हैं।

FAQ: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

प्रश्न 1: स्वच्छ स्पेस मिशन 2030 क्या है?

उत्तर: यह वर्ष 2030 तक भारतीय अंतरिक्ष मिशनों को मलबा-मुक्त बनाने से जुड़ा लक्ष्य है।

प्रश्न 2: अंतरिक्ष मलबा खतरनाक क्यों है?

उत्तर: यह सक्रिय उपग्रहों और अंतरिक्ष यानों से टकराकर नुकसान पहुंचा सकता है।

प्रश्न 3: इस पहल से क्या लाभ होगा?

उत्तर: उपग्रहों की सुरक्षा बढ़ेगी और अंतरिक्ष गतिविधियों को अधिक टिकाऊ बनाने में मदद मिलेगी।

SUNIL SHARMA | THE MORNING STAR

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