30 देशों के गठबंधन से बदलेगी क्रिटिकल मिनरल्स सप्लाई चेन, चीन की बढ़ सकती है चुनौती

दुनिया भर में क्रिटिकल मिनरल्स सप्लाई चेन को लेकर नई रणनीतियां बन रही हैं। चीन लंबे समय से महत्वपूर्ण खनिजों की माइनिंग और प्रोसेसिंग में अग्रणी रहा है। हालांकि अब भारत, अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया और 30 से अधिक देशों के सहयोग से एक वैकल्पिक क्रिटिकल मिनरल्स सप्लाई चेन विकसित करने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इलेक्ट्रिक वाहन, स्मार्टफोन, सेमीकंडक्टर और रक्षा उपकरणों की बढ़ती मांग के कारण इन खनिजों का महत्व लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में किसी एक देश पर निर्भरता कम करना वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए जरूरी हो गया है।

भारत के पास रेयर अर्थ खनिजों का बड़ा भंडार मौजूद है। यही वजह है कि सरकार खनन, प्रसंस्करण और विनिर्माण क्षमता बढ़ाने पर फोकस कर रही है। हाल ही में घोषित रेयर अर्थ कॉरिडोर और अंतरराष्ट्रीय साझेदारियां इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम माने जा रहे हैं। यदि यह पहल सफल होती है, तो आने वाले वर्षों में भारत वैश्विक क्रिटिकल मिनरल्स सप्लाई चेन का प्रमुख केंद्र बन सकता है। इससे न केवल रोजगार बढ़ेंगे बल्कि भारत की आर्थिक और रणनीतिक स्थिति भी मजबूत होगी।

FAQ

प्रश्न: क्रिटिकल मिनरल्स क्या होते हैं?
उत्तर: ऐसे महत्वपूर्ण खनिज जो अर्थव्यवस्था, तकनीक और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए आवश्यक होते हैं।

प्रश्न: भारत किन देशों के साथ काम कर रहा है?
उत्तर: भारत अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और कई अन्य देशों के साथ सहयोग कर रहा है।

प्रश्न: इसका सबसे बड़ा लाभ क्या होगा?
उत्तर: चीन पर निर्भरता कम होगी और सुरक्षित सप्लाई चेन विकसित होगी।

Jai Sharma | The Morning Star

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