नई दिल्ली, 22 अक्टूबर 2026। देश में नशीले पदार्थों के सेवन और अवैध तस्करी को रोकने के लिए नशामुक्त भारत अभियान के तहत जागरूकता और रोकथाम के प्रयास किए जा रहे हैं। इस पहल का मुख्य उद्देश्य युवाओं, विद्यार्थियों और समाज के विभिन्न वर्गों को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना है।
नशामुक्त भारत अभियान में युवाओं की भागीदारी जरूरी
नशे की समस्या केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है। इसका असर परिवार, शिक्षा, रोजगार और सामाजिक जीवन पर भी पड़ता है। इसलिए स्कूलों, कॉलेजों और सामाजिक संस्थाओं के माध्यम से जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने वर्ष 2020 में नशामुक्त भारत अभियान शुरू किया था। इसका उद्देश्य नशीले पदार्थों की मांग कम करना, नशे की रोकथाम और जरूरतमंद लोगों को उपचार एवं पुनर्वास सेवाओं से जोड़ना है।
नशे के खिलाफ सरकार और समाज की भूमिका
नशीले पदार्थों की तस्करी रोकने के लिए कानून प्रवर्तन एजेंसियों की भूमिका महत्वपूर्ण है। वहीं, नशे की लत से जूझ रहे लोगों को परामर्श, चिकित्सा सहायता और सामाजिक सहयोग उपलब्ध कराना भी जरूरी है।
विशेषज्ञों के अनुसार, परिवार का सहयोग, सही जानकारी और समय पर उपचार नशे से उबरने में मददगार हो सकते हैं।
नशामुक्त भारत अभियान को सफल बनाने के लिए सरकारी प्रयासों के साथ नागरिकों की सक्रिय भागीदारी भी आवश्यक है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
प्रश्न 1: नशामुक्त भारत अभियान कब शुरू हुआ?
उत्तर: यह अभियान 15 अगस्त 2020 को शुरू किया गया था।
प्रश्न 2: अभियान का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर: नशे की रोकथाम, जागरूकता, उपचार और पुनर्वास को बढ़ावा देना।
प्रश्न 3: नशे से संबंधित सहायता कहां मिलेगी?
उत्तर: राष्ट्रीय नशामुक्ति हेल्पलाइन 14446 पर सहायता ली जा सकती है।