मणिपुर में राष्ट्रपति शासन छह महीने और बढ़ा, राज्यसभा में amid हंगामे पारित हुआ प्रस्ताव

मणिपुर में राष्ट्रपति शासन छह महीने और बढ़ा, राज्यसभा में हंगामे के बीच पारित हुआ प्रस्ताव

मणिपुर में लागू राष्ट्रपति शासन की अवधि को 6 महीने के लिए और बढ़ा दिया गया है। यह निर्णय 13 अगस्त 2025 से प्रभावी होगा। यह प्रस्ताव केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय द्वारा राज्यसभा में 6 अगस्त 2025 को पेश किया गया था। प्रस्ताव को संविधान के अनुच्छेद 356 के अंतर्गत पेश किया गया, जो किसी राज्य में संविधान के प्रावधानों के उल्लंघन या कानून-व्यवस्था की गंभीर स्थिति में राष्ट्रपति शासन लागू करने की अनुमति देता है।”


राष्ट्रपति शासन क्यों बढ़ाया गया?

मणिपुर में पिछले कुछ समय से जारी:

  • जातीय संघर्ष
  • कानून-व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति
  • प्रशासनिक अस्थिरता

इन कारणों से 13 फरवरी 2025 को मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लगाया गया था, जिसकी अवधि 13 अगस्त 2025 को समाप्त हो रही थी। अब इस अवधि को 6 और महीनों के लिए बढ़ाया गया है।


राज्यसभा में प्रस्ताव पेश, हंगामे के बीच हुआ पारित

केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने राज्यसभा में राष्ट्रपति शासन की अवधि बढ़ाने संबंधी प्रस्ताव पेश किया। उन्होंने कहा:

“यह सदन मणिपुर राज्य के संबंध में राष्ट्रपति द्वारा 13 फरवरी 2025 को अनुच्छेद 356 के अंतर्गत जारी की गई उद्घोषणा की प्रभावशीलता को 13 अगस्त 2025 से आगे छह माह की अवधि के लिए बनाए रखने की स्वीकृति देता है।”

हालांकि, विपक्ष की ओर से सदन में बिहार में मतदाता सूची समीक्षा (SIR) पर चर्चा की मांग को लेकर जबरदस्त हंगामा हुआ। कांग्रेस सहित विपक्षी दलों ने नारेबाजी करते हुए बहस की मांग की, लेकिन उसी दौरान मणिपुर राष्ट्रपति शासन विस्तार का प्रस्ताव पारित कर दिया गया।


पृष्ठभूमि: मणिपुर की संवेदनशील स्थिति

मणिपुर पिछले कुछ वर्षों से:

  • कुकी और मैतेई समुदायों के बीच हिंसा
  • स्थानीय प्रशासन की निष्क्रियता
  • और राजनीतिक अस्थिरता से जूझ रहा है।

कई जानें जा चुकी हैं, हजारों लोग बेघर हुए हैं और सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ है। इन परिस्थितियों में केंद्र सरकार ने वहां राष्ट्रपति शासन लागू करना आवश्यक समझा।


संवैधानिक प्रावधान क्या कहते हैं?

संविधान का अनुच्छेद 356 राष्ट्रपति को यह अधिकार देता है कि यदि किसी राज्य में संविधान का पालन नहीं हो रहा है, तो वह:

  • राज्य विधानसभा को भंग कर सकता है
  • राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू कर सकता है
  • राज्य प्रशासन को केंद्र के नियंत्रण में ले सकता है

राष्ट्रपति शासन की एक बार की अवधि 6 महीने तक वैध होती है और उसे अधिकतम 3 वर्षों तक बढ़ाया जा सकता है, लेकिन हर बार संसद की स्वीकृति आवश्यक होती है।


हंगामे के कारण राज्यसभा स्थगित

प्रस्ताव पारित होने के बाद भी विपक्षी हंगामा थमा नहीं, जिस कारण राज्यसभा की कार्यवाही को बुधवार सुबह 11 बजे तक स्थगित करना पड़ा। यह राजनीतिक गतिरोध बताता है कि संसद में सत्ता और विपक्ष के बीच संवाद की आवश्यकता कितनी महत्वपूर्ण है।


“मणिपुर राष्ट्रपति शासन विस्तार केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं है, बल्कि राज्य की गंभीर स्थिति को दर्शाता है। केंद्र सरकार की ज़िम्मेदारी है कि वह न केवल वहां शांति बहाल करे, बल्कि राजनीतिक समाधान भी तलाशे। विपक्ष की मांगें और संसद में हंगामा यह भी दिखाते हैं कि लोकतंत्र में संवाद, सहमति और पारदर्शिता का कितना महत्व है।”

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